रसेन्द्रसारसंग्रह (गोपालकृष्ण - पं. रामप्रसाद वैद्य सविस्तार सान्वय हिन्दी टीका सहित)
Rasendra Sara Sangraha of Gopalakrishna with Commentary
गोपालकृष्ण भट्ट (टीकाकार: पं. रामप्रसाद वैद्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ५५६ ) रसेन्द्रसार० परिशिष्ट ।
निंबके पत्र, पटोलपत्र, कूठ, वच, गूगल, पीली सरसों, हरड़का
छिलका इन सबको पीसकर घी मिलाकर धूप देनेसे विषम ज्वर दूर
होता है ॥ १७ ॥
इति पटियालाराज्यस्थवैद्यरत्नपं० रामप्रसादराजवैद्यवैद्योपाध्यायकृतभाषा-
टीकायां परिशिष्टभागः समाप्तः ॥
ऊनविंशशते वर्षे सप्तत्या ह्यधिके शुभे ।
पौषशुक्लदशम्यां वै टीका पूर्तिमागादियम् ॥
सेयं रामप्रसादेन कृता लोकहितेच्छुना ।
कृपया शोधनीयं तत् त्रुटितं चात्र यत्क्वचित् ॥
⸱ समाप्तश्चायं ग्रन्थः ।
पुस्तकें मिलने के स्थान
१) खेमराज श्रीकृष्णदास, ३) गंगाविष्णु श्रीकृष्णदास
श्रीवेंकटेश्वर स्टीम प्रेस, लक्ष्मीवेंकटेश्वर स्टीम प्रेस,
खेमराज श्रीकृष्णदास मार्ग, व बुक डिपो,
खेतवाडी, मुंबई - ४०० ००४. अहिल्याबाई चौक, कल्याण
२) खेमराज श्रीकृष्णदास, (जि. ठाणे - महाराष्ट्र)
६६, हडपसर इण्डस्ट्रिअल इस्टेट ४) खेमराज श्रीकृष्णदास,
पुणे - ४११०१३. चौक - वाराणसी (उ.प्र.)