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सर्वकोश
रसेन्द्रसारसंग्रह (गोपालकृष्ण - पं. रामप्रसाद वैद्य सविस्तार सान्वय हिन्दी टीका सहित)

रसेन्द्रसारसंग्रह (गोपालकृष्ण - पं. रामप्रसाद वैद्य सविस्तार सान्वय हिन्दी टीका सहित)

Rasendra Sara Sangraha of Gopalakrishna with Commentary

गोपालकृष्ण भट्ट (टीकाकार: पं. रामप्रसाद वैद्य) द्वारा

DevanagariHindipublished584 पृष्ठ

पृष्ठ 403, कुल 584 में से

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पृष्ठ 403

भाषाटीकासहित । ( ३७७ )
अन्य योग-शिलाजीत और गूगल अथवा पीपल और सोंठके चूर्ण-
को गोमूत्रके साथ अथवा दशमूलके काथके साथ सेवन करनेसे ऊरु-
स्तम्भ रोग नष्ट होता है । प्लीहाधिकारोक्त वारिशोषण रस अथवा
अन्यान्य योगवाही रस भी इसमें प्रयुक्त करने चाहिये ॥ ४ ॥ ५ ॥
इति ऊरुस्तम्भचिकित्सा ।
अथ आमवाताधिकार ।
आमवातारी वटिका ।
रसगन्धकलौहाभ्रं तुत्थं टङ्कणसैन्धवम् ।
समभागं विचूर्ण्याथ चूर्णाद्विगुणगुग्गुलुः ॥ १ ॥
गुग्गुलोः पादिकं देयं त्रिवृतामूलवल्कलम् ।
तत्समं चित्रकं देयं घृतेन परिमर्द्दयेत् ॥ २ ॥
खादेन्माषद्वयञ्चास्य त्रिफलाचूर्णयोगतः ।
आमवातारिवटिका पाचिका भेदिका मता ॥ ३ ॥
आमवातं निहन्त्याशु गुल्मशूलोदराणि च ।
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