रसेन्द्रसारसंग्रह (गोपालकृष्ण - पं. रामप्रसाद वैद्य सविस्तार सान्वय हिन्दी टीका सहित)
Rasendra Sara Sangraha of Gopalakrishna with Commentary
गोपालकृष्ण भट्ट (टीकाकार: पं. रामप्रसाद वैद्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( १३२ ) रसेन्द्रसारसंग्रह ।
लेहयेन्निष्कमात्रान्तु गलत्कुष्ठञ्च नाशयेत् ।
दधिमस्तुसिताक्षौद्रैः वटीञ्चानन्दभैरवीम् ॥ १६ ॥
भक्षयेन्मूत्रकृच्छ्रार्त्तो यवक्षारं सितान्वितम् ।
गोदुग्धं कथितञ्चानु शीतलं मधुना पिबेत् ॥ १७ ॥
गुञ्जामूलं पिबेत्क्षीरैरनुपानं प्रशस्यते ।
अनेन चानुपानैन वटिकाऽऽनन्दभैरवी ॥
देया रुद्रजटाक्षौद्रैः सर्वमेहप्रशान्तये ॥ १८ ॥
इस आनन्दभैरवी गोलीके सेवन करनेसे त्रिदोषज अतीसार नष्ट
होता है । इस औषधि पर शाकरहित पथ्य सेवन करे । इस औष-
धिका सेवन करके ऊपरसे वरनेकी छालका क्वाथ पान करनेसे सात
दिनमें अश्मरीरोग नष्ट होता है । बावचीके तेलके साथ निष्क प्रमाण
इस औषधिके सेवन करनेसे गलत्कुष्ठ नष्ट होता है । मूत्रकृच्छ्ररोगी
दहीके तोड़, मिश्री