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सर्वकोश
रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक)

रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक)

Rasatarangini of Sadananda Sharma with Prasadani Commentary

सदानन्द शर्मा (टीकाकार: पं. हरिदत्त शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished799 पृष्ठ

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पृष्ठ 750

चतुर्विंशस्तरङ्गः ७२५
मोदकस्यास्य सततं मासत्रयनिषेवणात् ।
कामरूपो भवेन्मर्त्यस्तथा भीमपराक्रमः ॥४२५॥
स्मरस्मयस्मेरदृशो नवयौवनघूर्णिताः ।
प्रमदास्तोषयत्यस्य सेवकोऽपतितध्वजः ॥४२६॥
मदनोदयमोदकः-जातिपत्रीफले इति जातिपत्री जातिफलञ्चेति । मांसी जटा-
मांसी, चन्द्रः कर्पूरम्, दारुसिता गुडत्वक् । विशोधिता भंगा जातिपत्यादीनां
चूर्णादर्द्धपरिमाणा ग्राह्या । रसमाषकसंमितानीति षएमाषकप्रमितान्॥४१८-४२६॥
भा.टी. - जावित्री, जायफल, जटामांसी, लौंग, कपूर, काश्मीरी केसर,
छोटी इलायची बीज, दालचीनी, सोंठ, मिर्च, पीपल, बंगभस्म, अभ्रक (कृष्ण)
भस्म, लोहभस्म, रससिन्दूर, प्रत्येक एक-एक तोला, शतावर चूर्ण, गोखरूचूर्ण,
मुनक्का या किसमिस, काकड़ासिंगीचूर्ण, खरेटीमुलचूर्ण, कौंचबीजचूर्ण, बीज-
बन्द, कूट, विधाराबीजचूर्ण, प्रत्येक दो-दो तोला लें । भांग का चूर्ण इन सब
से आधा भाग, खांड़ भांगसहित सब औषधियों से दुगुनी लें । अब सबको एकत्र
अच्छी तरह पीसकर (खांड को छोड़कर) रख लें । खांड की चाशनी बना उसमें
जावित्री आदि अन्य सब औषधियों को मिलाकर ३ मासे से लेकर छः मासे तक
के मोदक (लड्डू) बना लें । इन मोदकों को 'मदनोदय मोदक' कहा जाता
है । यह मोदक सेवन करने पर विशेष रूप से कामशक्ति को बढ़ाते हैं । इन
मोदकों को उचित मात्रा में खाकर अनुपान में खूब औटाये हुए गाढ़े दूध में
खांड और इलायची चूर्ण मिला पीना चाहिए । इस दूध के अनुपान से ये मोदक
शरीर को बृंहण (मोटा) करते हैं । इन मोदकों को विधिपूर्वक उक्त दूध के साथ
निरन्तर तीन मास तक सेवन करने से मनुष्य का शरीर कामदेव के सदृश हो
जाता है और उसमें भीम के समान बल आ जाता है ॥४१८-४२६॥
त्रैलोक्यविजया वटी
भङ्गासत्त्वं भागिकं तु पूर्वोक्तविधिसोधितम् ।
तुगाक्षीरीरजश्चैव भागत्रितयसम्मितम् ॥४२७॥
संमर्द्य वारिणा खल्वे वाटिका रक्तिकोन्मिताः ।
निर्मापयेत्प्रयत्नेन रसतन्त्रविचक्षणः ॥४२८॥
वटिकैयं समाख्याता त्रैलोक्यविजयाभिधा ।
प्रलापोन्मादशमनी वृक्कशूलप्रणाशिनी ॥४२६॥
रजःशूलहरा चैव यक्ष्मकासनिवारिका !