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सर्वकोश
रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक)

रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक)

Rasatarangini of Sadananda Sharma with Prasadani Commentary

सदानन्द शर्मा (टीकाकार: पं. हरिदत्त शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished799 पृष्ठ

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पृष्ठ 716

चतुर्विंशस्तरङ्गः ६६१
जिसने अफीम को विषैली मात्रा में खा लिया हो वह मोह-निद्रा में पड़ा
रहता है और पुकारकर जगाना कठिन होता है। इसकी त्वचा शीत स्पर्शी,
मुख और ओष्ठ कुछ श्याम वर्ण, नाड़ी अतिशिथिल और मन्द चलती है।
श्वास भी मन्द और विषम चलती है। नेत्र की पुतलियाँ संकुचित हो जाती
हैं। अन्त में श्वासरोध के कारण मृत्यु हो जाती है।
खायी हुई अफीम को बाहर निकालने के लिए राई या मदनफलचूर्ण को
गरम जल में मिलाकर वमन देनी चाहिए। अथवा वमन के लिए ऐपोमा-
र्फीन (Apomorphine) १/८ से १/२ यव मात्रा में सूचीवेध द्वारा देनी चाहिए।
यदि अफीम खाये देर हो गयी हो और अफीम पक्वाशय में पहुँच गयी हो तो
उसे ५, ५ मासे त्रिवृत्-चूर्ण देकर विरेचन देना चाहिए। हृदय की गति को
उत्तेजित करने के लिए उत्तेजक द्रव्य जैसे चाय, काफी का तीव्र फाण्ट पिलाना
या कस्तूरी और विषमुष्टि वारुणीसार पिलाना चाहिए। इसके अतिरिक्त अन्य
उत्तेजक औषधियां जैसे ब्राण्डी, स्ट्रिक्नीन १/८० ग्रेन का सूचीवेध दें। और
अमोनिया सुँघावें। हृदय को बल देने के लिए एट्रोपीन सल्फेट (Atropine
sulphate) १/८० यव का सूचीवेध, या कनकासव, या वैले, डोला आसव ३०
बूँद मात्रा में पुतली फैलने तक एक-एक घंटे पीछे देवें।
खस्तिलनिर्यासस्य निर्मलीकरणम्
खस्तिलस्य तु निर्यासं सलिले तु सुनिर्मले।
सान्द्राय्य खलु यत्नेन वस्त्रपूतन्तु कारयेत् ॥२३७॥
निर्मलीकृतमेतत्तु खस्तिलद्रवतोयकम् ।
गव्यदुग्धसमायुक्तं पचेन्मन्दाग्नियोगतः ॥२३८॥
पाककालं सुविज्ञाय पाकविद्विषजां वरः।
समाहरेत्प्रयत्नेन त्वफेनं निर्मलीकृतम् ॥२३९॥
खस्तिलनिर्यासनिर्मलीकरणप्रकारो निगदव्याख्यातः ॥२३७-२३६॥
भा.टी.—पोस्त डाटे से निकले हुए रस को स्वच्छ जल में घोलकर
कपड़े में छान लें। इस प्रकार साफ किये हुए पोस्तद्रव (रस) को जल में
थोड़ा गो-दूध मिलाकर उसे मन्द-मन्द अग्नि में पकायें। जब अच्छी तरह
पक जांय तो उसे नीचे उतारकर रख लें, इस विधि से अफीम साफ हो जाती
हैं ॥२३७-२३६॥
वक्तव्य—आज कल बाजार में मिलनेवाली अफीम में उसका भार
बढ़ाने के लिए अनेक द्रव्यों के रस मिला दिये जाते हैं। अथवा धतूरे का