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सर्वकोश
रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक)

रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक)

Rasatarangini of Sadananda Sharma with Prasadani Commentary

सदानन्द शर्मा (टीकाकार: पं. हरिदत्त शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished799 पृष्ठ

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विषय पृष्ठ | विषय पृष्ठ
द्वाविंश तरङ्ग | शोधन प्रकार ५७७
पित्तल का नाम ५६६ | द्वितीय शोधन ,,
पित्तल का निर्माण ,, | तृतीय शोधन ५७८
ग्राह्य पित्तल ५७० | स्रोतोऽञ्जन का गुण ५७८
हेय पित्तल ,, | सौवीराञ्जन का गुण ,,
पित्तल का शोधन ,, | स्रोत सौवीराञ्जन की मात्रा ५७६
पित्तल का द्वितीय शोधन ५७१ | पुष्पाञ्जन का परिचय ,,
पित्तल मारण ,, | पुष्पाञ्जन का गुण ५८०
पित्तल का द्वितीय मारण ,, | अञ्जन त्रितय का बाह्य प्रयोग ,,
पित्तल का तृतीय मारण ५७२ | तिमिरहराञ्जन ,,
पित्तल भस्म का गुण ,, | तुहिनाञ्जन ५८१
पित्तल भस्म की मात्रा ,, | शिलाजीत का नाम ,,
पित्तल रसायन ५७३ | शिलाजीत का परिचय ५८२
कांस्य का नाम ,, | शिलाजीत के भेद ५८३
कांस्य का निर्माण ,, | शिलाजीत का स्वरूप ,,
ग्राह्य कांस्य का लक्षण ,, | शिलाजीत शोधन ५८४
हेय कांस्य का लक्षण ५७४ | द्वितय शोधन ५८६
कांस्य शोधन ,, | तृतीय शोधन ,,
कांस्य द्वितीय शोधन ,, | शुद्ध शिलाजीत की परीक्षा ५८७
कांस्य मारण ,, | शुद्ध शिलाजीत का गुण ५८८
द्वितीय मारण ५७५ | शिलाजीत की मात्रा ५६१
तृतीय मारण ,, | शिलाजीत का आमयिक प्रयोग ,,
कांस्य भस्म का गुण ,, | गेरु का नाम ५६५
कांस्य भस्म का प्रयोग ,, | गेरु के दो भेद :•
अञ्जन का नाम और भेद ५७६ | गेरु का स्वरूप ',
स्रोतोऽञ्जन का नाम ,, | गेरु का शोधन ५६६
सौवीराञ्जन का नाम ५७७ | द्वितीय शोधन ,,
स्रोतोऽञ्जन का स्वरूप ,, | शुद्ध गेरु का गुण ,,
सौवीराञ्जन का स्वरूप ,, | शुद्ध गेरु की मात्रा ५६७