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सर्वकोश
रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक)

रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक)

Rasatarangini of Sadananda Sharma with Prasadani Commentary

सदानन्द शर्मा (टीकाकार: पं. हरिदत्त शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished799 पृष्ठ

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पृष्ठ 311

एकादशस्तरङ्गः २६६
भाग ( १/३० )-पर्यन्तमस्य मात्राव्यवहारो निरापद इति ध्येयं सुधीरैः ॥१४५॥
भा.टी.-संखियाभस्म या शुद्ध संखिया को रत्ती के एक सौ बीसवें ( १/१२० )
भाग से लेकर तीसवें ( १/३० ) भाग तक अन्ततः प्रयोग में ले सकते हैं ॥१४५॥
अन्यः प्रकारः
आरभ्य दशमांशात्तु सर्षपस्य प्रयत्नतः ।
तृतीयभागपर्यन्तं मात्रां मल्लस्य योजयेत् ॥ १४६ ॥
मात्राप्रकारान्तरं शिष्यबुद्धिसौकर्यार्थम् ॥ १४६ ॥
भा.टी.-एक सरसों के दशवें भाग ( १/१० ) से लेकर सरसों के तृतीय
भाग ( १/३ ) तक भी सोमल की मात्रा समझनी चाहिये ॥ १४६ ॥
वक्तव्य—रत्ती का १/१० वाँ भाग अथवा १/३ वाँ भाग तोलना कठिन होने
से यह द्वितीय मात्रा-निर्माण प्रकार बहुत सरल रहता है ।
शङ्खविषस्य मात्रानिर्माणविधिः
गुञ्जोन्मितं शंखविषं तिथिमाषकसंमिते ।
मरिचचूर्णे निक्षिप्य शृङ्गवेराम्भसा ततः ॥ १४७ ॥
खल्वमध्ये निधायाथ मर्दयेत् दिनत्रयम् ।
निर्मापयेत्ततो युक्त्या वटिकाँ रक्तिकोन्मिताः ॥ १४८ ॥
एकैकां वटिकाञ्चाथ सायम्रातस्ततो भिषक् ।
बीतशङ्कः प्रयुञ्जीत तत्तद्दोषापनुत्तये ॥ १४६ ॥
अनेनैव तु मानेन प्रयोगोद्दिष्टभेषजैः ।
एतत्सम्मेल्य निर्माय वटिकादीन् प्रयोजयेत् ॥ १५० ॥
मात्रानिर्माणप्रकारः—मल्लविषं १ गुञ्जा, मरिचचूर्णस्य १५ माषकाः ।
आर्द्रकजलेन पेषयेत् । स्पष्टमन्यत् ॥ १४७-१५० ॥
भा.टी.—एक रत्ती शुद्ध संखिया लेकर उसमें पन्द्रह मासा कालीमिर्च के
चूर्ण को मिला अदरक के रस से खरल में अच्छी तरह तीन दिन तक मर्दन
करके एक-एक रत्ती की गोलियाँ बना लें । अब इन गोलियों में से एक गोली
सुबह और एक गोली शाम को तत्तद् दोष शान्ति के लिए निःशंक होकर
प्रयोग करें । इसी प्रमाण से ही भिन्न-भिन्न प्रयोगों की औषधियों के साथ इसको
मिला कर गोली, चूर्ण आदि बना लें ॥ १४७-१५० ॥
मात्रानिर्माणे सावधानता
रक्तिसंमितमल्लस्य भक्षणात् पुरुषो यतः ।
यमालयं प्रयातीह सावधानतया ततः ॥ १५१ ॥