सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक)

रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक)

Rasatarangini of Sadananda Sharma with Prasadani Commentary

सदानन्द शर्मा (टीकाकार: पं. हरिदत्त शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished799 पृष्ठ

पृष्ठ 174, कुल 799 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 174

१३२ रसतरङ्गिणी
रसपर्पटिका साज्यमुन्मादमिह नाशयेत् ॥१४४॥
ब्राह्मीरससमायुक्ता गुञ्जाष्टकमिताशिता ।
रसपर्पटिका काममपस्मारं निवारयेत् ॥१४५॥
रामठेनार्धगुञ्जेन सगुञ्जाष्टकजीरका ।
रसपर्पटिका भुक्ता ग्रहणीं हन्ति दारुणाम् ॥१४६॥
व्योषनिम्बुदलोपेता भक्षिता रसपर्पटी ।
सप्ताहद्वितयेनैव त्वपस्मारं विनाशयेत् ॥ १४७ ॥
वर्धमानकबीजोत्थतैलेन परिशीलिता ।
शूलं गुग्गुलुना पाण्डुशोफं हन्यात्तु पर्पटी ॥१४८।
धूर्त्तबीजसमायुक्ता रसपर्पटिकाशिता ।
गुञ्जापञ्चकमात्रन्तु हन्त्युन्मादं विशेषतः ॥१४६॥
गोमूत्रेण समायुक्ता रसपर्पटिकाशिता ।
मासमात्रप्रयोगेण नाशयेद् गुदजामयम् ॥ १५० ॥
निम्बपञ्चकभल्लातवाकुचीभृङ्गसंयुता ।
निहन्ति सर्वकुष्ठानि रसपर्पटिकाशिता ॥१५१॥
दशमूलकषायेण शीलिता रसपर्पटी ।
विनाशयेद्विशेषेण दारुणं वातिकं ज्वरम् ॥ १५२ ॥
त्र्यूषणक्षोदसंयुक्ता रसपर्पटिकाशिता ।
विनिहन्त्यचिरादेव कासं खलु कफोत्थितम् ॥१५३॥
नाकुली रास्ना, रामठं हिङ्गु,वर्धमानक एरन्डः, निम्बपञ्चकं निम्बपञ्चाङ्गम॥
भा.टी.-पर्पटी को उन्माद रोग के लिये आठ रत्ती मात्रा तक लेकर रास्ना-
मूलचूर्ण के साथ गोघृत में मिलाकर सेवन करना चाहिये । दो से आठ रत्ती
मात्रा तक ब्राह्मीरस के साथ सेवन कराने से अपस्मार रोग को नष्ट करती है ।
आधी रत्ती हींग, आठ रत्ती रसपर्पटी, आठ रत्ती श्वेतजीरकचूर्ण मिलाकर
कुछ दिन सेवन करने से दुःसाध्य संग्रहणी रोग नष्ट हो जाता है । त्रिकटु-
चूर्ण और पर्पटी को मिला नींबू के पत्रकल्क के साथ सेवन करने से दो सप्ताह
में अपस्मार ( मृगी ) रोग नष्ट हो जाता है । उदरशूल में इसको एरन्डबीज-
तैल के साथ सेवन कराना चाहिये और शोथ युक्त पाण्डु रोग में इसको गुग्गु-
लुचूर्ण में मिलाकर सेवन कराना चाहिये । पाँच रत्ती मात्रा तक पर्पटी को
लेकर धत्तूरबीजचूर्ण के साथ सेवन कराने से उन्माद रोग को नष्ट करती है।