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सर्वकोश
रसार्णव (शैव रस-तन्त्र - प्राचीन भारतीय खनिज रसायन, धातुवाद एवं रस-चिकित्सा सटीक)

रसार्णव (शैव रस-तन्त्र - प्राचीन भारतीय खनिज रसायन, धातुवाद एवं रस-चिकित्सा सटीक)

Rasarnava: Tantric Chemistry and Alchemy with Commentary

शिव-पार्वती संवाद (सम्पादक: प्रफुल्लचन्द्र राय एवं हरीशचन्द्र कविराज) द्वारा

DevanagariHindipublished558 पृष्ठ

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पृष्ठ 106

षष्ठः पटलः । ८३
शोधयेत्त्रिदिनं वज्रं शुद्धिमेति¹ सुरेश्वरि ॥ ८० ॥
मेषशृङ्गं भुजङ्गास्थि कूर्मपृष्ठं² शिलाजतु ।
स्नुक्कीलालरसं स्तम्बं³ कान्तपाषाणमेव च ॥ ८१ ॥
वज्रकं चापि वैक्रान्तं⁴ तन्मध्ये प्रक्षिपेत् प्रिये ।
तीव्रानले पुटं⁵ दत्त्वा पुटान्तं⁶ यावदागतम् ॥ ८२ ॥
कुलत्थं कोद्रवं⁷ चापि हयमूत्रेण पेषयेत् ।
तप्तं निषेचयेत् पीठे⁸ यावत्तद्भङ्गतां गतम् ॥ ८३ ॥
एष कापालिको⁹ योगो वज्रमारण उत्तमः¹⁰ ॥ ८४ ॥
माक्षिकं मेषशृङ्गं च¹¹ शिलागन्धकटङ्कणम्¹² ।
वैक्रान्तं तालकं चापि¹³ वज्रोच्चीरपरिप्लुतम्¹⁴ ॥ ८५ ॥


(1) M reads सिद्धिमैति, which is not accurate. (2) B has कर्म-
पृष्ठ, which is evidently an error of the scribe. (3) स्नुहीमूलरसस्तम्बं,
a variant in K. (4) K reads वज्र चापि सुवज्र च. After this, next
four charaṇas are not found in K. (5) M reads पुटे. (6) B
reads पुटं तं, which seems to be an error. (7) M reads कुलत्थकोद्रव,
which is an error of the scribe. (8) B reads पीठे, which appears
to be inc. K reads पुठे. M reads तच्चाभिषेचयेत् पुठे. (9) B reads
काशालिको, which seems to be the blunder of the scribe. (10) B
and M read वज्रमरणसुत्तमम्, which can also be maintained grammati-
cally. (11) मेषभङ्गे च, a variant in B, which is evidently an error.
(12) शिलागन्धकटङ्करुं, a reading in M, which is incorrect. (13) B
reads जालकं चापि. K reads चैव. (14) M reads वज्रिचौर परिप्लुतम्,
which is inc.