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झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

Rani Lakshmibai of Jhansi Historical Biography

वृन्दावनलाल वर्मा / ऐतिहासिक शोध द्वारा

DevanagariHindipublished526 पृष्ठ

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पृष्ठ 72

लक्ष्मीबाई ६१
तात्या—'बडी तोपे चार हैं—बहुत बडी हैं। छोटी तो बहुत हैं।'
मनू—'किले के भीतर तालाब है?'
तात्या—'नही। एक पोखरा है। एक बडा कुआ भी है, उसमें
बहुत पानी रहता है। न जाने पहाड पर किसने खुदवाया होगा।'
नाना—'आदमियो ने खुदवाया होगा, देव-दानव तो खोदने आये
न होगे।'
तात्या को बाजीराव ने बुलवाया। बाजीराव ने पूछा, 'बच्चो में क्या
बात कर रहे थे?'
तात्या ने उत्तर दिया, 'झाँसी का हाल सुना रहा था।'
बाजीराव—'नारायण शास्त्री वाली बात तो नही सुनाई?'
तात्या—'नही सरकार। और न नाटकशाला की गाने-नाचने
वालियो की।'
बाजीराव—'तुम मोरोपन्त के साथ कुछ दिन के लिये झाँसी
जाओगे?'
तात्या—'हाँ श्रीमन्त।'
बाजीराव—'मुहूर्त पास का निकला है। जल्दी जाना होगा।'