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झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

Rani Lakshmibai of Jhansi Historical Biography

वृन्दावनलाल वर्मा / ऐतिहासिक शोध द्वारा

DevanagariHindipublished526 पृष्ठ

पृष्ठ 404, कुल 526 में से

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पृष्ठ 404

लक्ष्मीबाई ३६३
निपुण तोपची मारे गये हैं और अब कच्चे आदमी काम कर रहे हैं ।
रानी सहमत नही हुई ।
उन्होने कहा, 'अङ्गरेजो के सामने कोई नई दुविधा आ गई है ।
सेना और तोपखानो को बाट दिया गया है, और कोई बात नही ।'
रानी ने बडी दूरबीन उठाई । झासी की ओर आने वाले तात्या के
दस्तो को दूरी पर देखा । मुस्कराकर दूरबीन जवाहरसिंह के हाथ में दी ।
बोली, 'अब झासी का उद्धार निकट है ।'
जवाहरसिंह दूरबीन से देखकर उछल पडा । झासी भर में समाचार
फैल गया कि झासी की सहायता के लिये पेशवा की सेना आ गई ।
झासी से दिन भर गोलाबारी बहुत हल्की रही ।
लालता ने सम्मति दी, 'हमारे गोले कही पेशवा की सेना पर न पडे ।'
और गोलन्दाजो का भी यही मत था । पूर्व और उत्तर के तोपखाने
करीब करीब बन्द रहे । केवल पश्चिम और दक्षिण के तोपखाने कुछ
काम करते रहे ।
झासी की दिन भर की आशा सन्ध्या समय निराशा में परिवर्तित
होने को थी ।
टोरियो के बीचो बीच आते ही तात्या के दस्तो पर अङ्गरेजी
तोपखानो ने गोले बरसाये । ठोस और पोले भी जो फटकर तात्या के
घुड सवारो का सर्वनाश कर रहे थे । दस्ते तितर-बितर होने लगे । एक
ओर काशीबाई पड गई, दूसरी ओर जूही को जाना पडा ।
काशीबाई वाला बचा खुचा दस्ता अँग्रेज घुडसवारो के बीच में फँस
गया । पहले पिस्तौलें चली, फिर तलवार खिची ।
काशीबाई ने 'हर हर महादेव' कहा और पिल पडी । उसका स्वर
कोयल का सा था । अँग्रेज घुडसवार समझ गये कि पुरुष वेश में
स्त्री है ।
उनको भ्रम हुआ ।
एक बोला, 'रानी है ।'