रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)
Ranganatha Ramayana: Complete Hindi Translation
रंगनाथ कवि (हिन्दी अनुवादक: अवधेश गुप्त) द्वारा
पृष्ठ 300, कुल 508 में से
संदर्भ में पढ़ेंके चार द्वार हैं । बाहर का दुर्ग कई कंगूरों से युक्त है और ईंटों का बना हुआ है ।
अस्सी करोड़ सैनिक उसके पश्चिमी द्वार की रक्षा करते रहते हैं । सात सौ सतहत्तर करोड़ सैनिक
उत्तर द्वार की रक्षा करते हैं । पूर्व के द्वार पर सतत एक सौ करोड़ मदमत्त सैनिक
दुर्ग-रक्षण में तत्पर रहते हैं । दक्षिण द्वार पर साठ करोड़ बलवान् सैनिक रहते हैं । उस दुर्ग
के भीतर के छहों दुर्गों के कुल चौबीस द्वार हैं, जिनकी रक्षा भी उतनी ही संख्या के राक्षस-
सैनिक करते रहते हैं । प्रत्येक गुप्त द्वार के पास एक-एक करोड़ शक्तिशाली राक्षस रहते हैं ।
नगर के मध्य में नगर की रक्षा में बीस लाख सात सौ करोड़ राक्षस तत्पर रहते हैं ।
कुंभकर्ण की शयन-गुफा की रक्षा सात करोड़ राक्षस करते रहते हैं । रावण के महल
के आंगन की रक्षा करने में एक लाख करोड़ राक्षस लगे रहते हैं । उसके द्वार पर बीस करोड़
राक्षस रहते हैं । इंद्रजीत के भवन के द्वार पर दस सहस्र करोड़ राक्षसवीर रहते हैं ।
विशालकाय श्रेष्ठ राक्षसवीरों के गृहों के पास दस सहस्र करोड़ सैनिक रहते हैं । हे
सूर्यकुलाधीश, उस सेना की गिनती असंभव है, वह बहुत ही विशाल है । स्वयं रावण
की