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सर्वकोश
रामप्रसाद 'बिस्मिल' की आत्मकथा (काकोरी के अमर शहीद की जेल डायरी व आत्मकथा)

रामप्रसाद 'बिस्मिल' की आत्मकथा (काकोरी के अमर शहीद की जेल डायरी व आत्मकथा)

Autobiography of Ram Prasad Bismil

पं. रामप्रसाद 'बिस्मिल' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा

DevanagariHindipublished128 पृष्ठ

पृष्ठ 87, कुल 128 में से

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पृष्ठ 87

वृहत् संगठन 75
हार्टन साहब को मालूम हुआ कि मेरठ में प्रांत की क्रांतिकारी समिति की बैठक
होने वाली है। उन्होंने एक सब इंस्पेक्टर को मेरठ अनाथालय में, जहाँ पर बैठक
होने का पता चला था, भेजा। उन्हीं दिनों हार्टन साहब को किसी विशेष सूत्र से
मालूम हुआ कि शीघ्र ही कनखल में डाका डालने का प्रबंध क्रांतिकारी समिति के
सदस्य कर रहे थे और संभव है कि किसी बड़े शहर में डाकखाने की आमदनी
लूटी जाए। हार्टन साहब को एक सूत्र से एक पत्र मिला जो मेरे हाथ का
लिखा था। इस पत्र में सितंबर में होने वाले ‘श्राद्ध’-8 का जिक्र था जिसकी 13
तारीख निश्चित की गई थी। पत्र में था कि दादा का श्राद्ध नं. 1 पर 13
सितंबर को होगा, अवश्य पधारिए। मैं अनाथालय में मिलूँगा। पत्र पर “रुद्र”
के हस्ताक्षर थे।
आगामी डकैतियों को रोकने के लिए
हार्टन साहब ने प्रांत भर में 26 सितंबर
सन् 1925 ई. को लगभग तीस व्यक्तियों
को गिरफ्तार किया। उन्हीं दिनों में इंदुभूषण
के पास आए हुए पत्र से पता लगा कि
कुछ वस्तुएँ बनारस में किसी विद्यार्थी की
कोठरी में बंद हैं। अनुमान किया गया कि
संभव है कि वे हथियार हों। अनुसंधान
करने से हिन्दू विश्वविद्यालय के एक विद्यार्थी
की कोठरी से दो राइफलें निकलीं। उस
विद्यार्थी को कानपुर में गिरफ्तार किया गया।
इंदुभूषण ने मेरी गिरफ्तारी की सूचना एक
पत्र द्वारा बनारस को भेजी। जिसके पास राजेन्द्र लाहिड़ी
पत्र भेजा था, उसे पुलिस गिरफ्तार कर चुकी थी, क्योंकि उसी, श्री रामनाथ
पाण्डेय के पते का पत्र मेरी गिरफ्तारी के समय मेरे मकान से पाया गया था।