रामप्रसाद 'बिस्मिल' की आत्मकथा (काकोरी के अमर शहीद की जेल डायरी व आत्मकथा)
Autobiography of Ram Prasad Bismil
पं. रामप्रसाद 'बिस्मिल' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंUploaded By Rajesh Tanti.
मानते हैं। परंतु वह अपने अध्ययन और अनुभवों के आधार पर इस निष्कर्ष पर पहुंचते हैं
कि युवकों को आतंक और व्यक्तिगत हत्याओं, का मार्ग छोड़कर खुले जन आंदोलन में शामिल
होना चाहिए। वह युवकों, मजदूरों व किसानों को संगठित करके उन्हें आज़ादी की लड़ाई में
उतारने और सच्चे समाजवाद की विचारधारा को अपनाने की सलाह देते हैं।
रामप्रसाद बिस्मिल और उनके परिवार ने गरीबी का जीवन विताया था और देश की
गरीब व अशिक्षित जनता की पीड़ा को निकट से देखा था। वास्तव में वह इसी गरीब जनता
और देशप्रेमी युवकों के सच्चे प्रतिनिधि थे। अनेक अन्य क्रांतिकारियों व स्वाधीनता सेनानियों
की तरह वह यही चाहते थे कि स्वतंत्र भारत में जनता को गरीबी और शोषण से मुक्त
कराया जाए। यही उनका सपना था। उनके सपने और संकल्प को पूरा करना ही आज हमारा
सबसे बड़ा कर्त्तव्य है। इसके अतिरिक्त .रामप्रसाद बिस्मिल हिन्दू, मुसलमान, सिख, ईसाई सभी
धर्मों, संप्रदायों और जातियों में एकता चाहते थे।
इस पुस्तक में शहीद रामप्रसाद बिस्मिल की आत्मकथा मूल रूप में दी गई है। परंतु
स्कूली छात्रों को ध्यान में रखकर इसे उनकी रुचि और स्तर के अनुरूप संपादित किया गया
है।
स्वाधीनता के वाद देश में छात्रों व युवकों को स्वाधीनता आंदोलन तथा देश की
आज़ादी के लिए किए गए संघर्ष, त्याग, वलिदान और मुक्ति आंदोलन के मूल्यों व सपनों की
पर्याप्त शिक्षा दी जानी चाहिए। आशा है कि शहीद रामप्रसाद विस्मिल की इस आत्मकथा के
अध्ययन से छात्रों को क्रांतिकारी आंदोलन तथा क्रांतिकारियों के विचारों की जानकारी मिलेगी
और उनके हृदय में देशप्रेम, त्याग व देशसेवा की भावना उत्पन्न होगी।
वी-55, गुलमोहर पार्क विश्वमित्र उपाध्याय
नई दिल्ली-110 049