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सर्वकोश
रामप्रसाद 'बिस्मिल' की आत्मकथा (काकोरी के अमर शहीद की जेल डायरी व आत्मकथा)

रामप्रसाद 'बिस्मिल' की आत्मकथा (काकोरी के अमर शहीद की जेल डायरी व आत्मकथा)

Autobiography of Ram Prasad Bismil

पं. रामप्रसाद 'बिस्मिल' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा

DevanagariHindipublished128 पृष्ठ

पृष्ठ 7, कुल 128 में से

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पृष्ठ 7

Uploaded By Rajesh Tanti.
प्रस्तावना
शहीद रामप्रसाद बिस्मिल भारत के गौरवपूर्ण क्रांतिकारी आंदोलन के अग्रणी नेता व संगठनकर्ता
थे। यही नहीं बल्कि बिस्मिल बेजोड़ राष्ट्रीय कवि, लेखक व सफल अनुवादक भी थे।
रामप्रसाद बिस्मिल की क्रांतिकारी कार्रवाइयों की तरह उनकी साहित्यिक कृतियों ने स्वतंत्रता-
प्रेमियों को संघर्ष व बलिदान के मार्ग पर अग्रसर किया। स्वतंत्रताप्रेमी जन सभाओं, जेलों की
बैरकों और फाँसी की कोठरियों में बिस्मिल की संघर्ष व बलिदान की भावनाओं से ओतप्रोत
कविताएँ और नज़्में गाते थे। यह पुस्तक इसी क्रांतिवीर रामप्रसाद बिस्मिल की आत्मकथा है।
इसे पढ़कर आज भी हमारे प्यारे देश के स्वाधीनता संग्राम में किए गए बलिदानों की याद
ताज़ा हो जाती है। रामप्रसाद बिस्मिल ने यह आत्मकथा गोरखपुर जेल में 19 दिसंबर सन्
1927 को हुई अपनी फाँसी से दो दिन पूर्व अत्यंत कठिन परिस्थितियों में लिखकर समाप्त की
थी। बनारसीदास चतुर्वेदी ने लिखा है : "रामप्रसाद बिस्मिल का आत्मचरित्र हिन्दी का सर्वश्रेष्ठ
आत्मचरित्र है। जिन परिस्थितियों में वह लिखा गया था, उनके बीच में से गुज़रने का मौका
लाखों में से एकाध को ही मिल सकता है।"
बिस्मिल ने अपनी यह आत्मकथा रजिस्टर के साइज के कागजों पर पेंसिल से लिखकर
तीन खेपों में न जाने किस प्रकार गुप्त रूप से गोरखपुर के सुप्रसिद्ध कांग्रेसी नेता दशरथ
प्रसाद द्विवेदी को भिजवाई थी। अंतिम खेप तो फाँसी से एक दिन पूर्व ही द्विवेदीजी के पास
पहुँची थी। द्विवेदीजी ने इसे गणेश शंकर विद्यार्थी को दिया था। विद्यार्थीजी ने इस आत्मकथा
को 'काकोरी के शहीद' नामक पुस्तक के प्रारंभ में प्रकाशित कराया था। यह आत्मकथा
ऐतिहासिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण कृति है। इसमें रामप्रसाद बिस्मिल के अभाव-ग्रस्त
पारिवारिक जीवन, उनके सद्‌चरित्र, देशप्रेम व बलिदान की भावना तथा आम आदमी के सुख
व समृद्धि की उनकी उत्कट अभिलाषा की जानकारी तो मिलती ही है, इसमें देश के
क्रांतिकारी आंदोलन, उसकी विचारधारा, शक्ति और कमजोरियों पर भी प्रकाश पड़ता है। इस
आत्मकथा में बिस्मिल स्वाधीनता-संग्राम में सशस्त्र क्रांतिकारी संघर्ष के योगदान को महत्वपूर्ण