रामप्रसाद 'बिस्मिल' की आत्मकथा (काकोरी के अमर शहीद की जेल डायरी व आत्मकथा)
Autobiography of Ram Prasad Bismil
पं. रामप्रसाद 'बिस्मिल' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा
पृष्ठ 75, कुल 128 में से
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बृहत् संगठन 63
[चित्र: मन्मथनाथ गुप्त] तीसरे दर्जे की जंजीर खींचने से गाड़ी
खड़ी न हो, क्योंकि तीसरे दर्जे में अक्सर
प्रबंध ठीक नहीं रहता है। इस कारण से
दूसरे दर्जे की जंजीर खींचने का प्रबंध
किया। सब लोग उसी ट्रेन में सवार थे।
गाड़ी खड़ी होने पर सब उतरकर गार्ड के
डिब्बे के पास पहुँच गए। लोहे का संदूक
उतारकर छेनियों से काटना चाहा, छेनियों
मन्मथनाथ गुप्त ने काम न किया, तब कुल्हाड़ा चला।
मुसाफिरों से कह दिया कि सब गाड़ी में चढ़ जाओ। गाड़ी का गार्ड गाड़ी
में चढ़ना चाहता था, पर उसे जमीन पर लेट जाने की आज्ञा दी, ताकि बिना
गार्ड के गाड़ी न जा सके। दो आदमियों को नियुक्त किया कि वे लाइन की
पगडंडी को छोड़कर घास में खड़े होकर गाड़ी से हटे हुए गोली चलाते रहें। एक
सज्जन गार्ड के डिब्बे से उतरे। उनके पास भी माउजर पिस्तौल था। विचारा कि
ऐसा शुभ अवसर जाने कब हाथ आए। माउजर पिस्तौल काहे को चलाने को
मिलेगा ? उमंग जो आई, सीधी करके दागने लगे। मैंने जो देखा तो डाँटा,
क्योंकि गोली चलाने की उनकी ड्यूटी ही नहीं थी। फिर यदि कोई मुसाफिर
कौतूहल-वश बाहर को सिर निकाले तो उसके गोली जरूर लग जाए। हुआ भी
ऐसा ही, जो व्यक्ति रेल से उतरकर अपनी
स्त्री के पास जा रहा था, मेरा ख्याल है
कि उन्हीं महाशय की गोली उसको लग
गई, क्योंकि जिस समय यह महाशय
संदूक नीचे डालकर गार्ड के डिब्बे से उतरे
थे, केवल दो-तीन फायर हुए थे। उसी
समय स्त्री ने कोलाहल किया होगा और [चित्र: भूपेन्द्रनाथ सान्याल]
भूपेन्द्रनाथ सान्याल