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रामप्रसाद 'बिस्मिल' की आत्मकथा (काकोरी के अमर शहीद की जेल डायरी व आत्मकथा)

रामप्रसाद 'बिस्मिल' की आत्मकथा (काकोरी के अमर शहीद की जेल डायरी व आत्मकथा)

Autobiography of Ram Prasad Bismil

पं. रामप्रसाद 'बिस्मिल' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा

DevanagariHindipublished128 पृष्ठ

पृष्ठ 29, कुल 128 में से

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आत्म-चरित्र 17

लिया और भोजनादि का ठीक-ठीक प्रबंध करने लगीं। मेरे जन्म होने के पाँच या
सात वर्ष बाद उन्होंने हिन्दी पढ़ना आरंभ किया। पढ़ने का शौक उन्हें खुद ही
पैदा हुआ था। मुहल्ले की सखी-सहेली जो घर पर आया करती थीं, उन्हीं में जो
शिक्षित थीं, माताजी उनसे अक्षर-बोध करतीं। इस प्रकार, घर का सब काम कर
चुकने के बाद जो कुछ समय मिल जाता, उसमें पढ़ना-लिखना करतीं। परिश्रम के
फल से थोड़े दिनों में ही वह देवनागरी पुस्तकों का अध्ययन करने लगीं। मेरी
बहनों को छोटी आयु में, माताजी ही उन्हें शिक्षा दिया करती थीं। जब से मैंने
आर्यसमाज में प्रवेश किया, तब से माताजी से खूब वार्तालाप होता। उस समय
की अपेक्षा अब उनके विचार भी कुछ उदार हो गए हैं। यदि मुझे ऐसी माता न
मिलतीं, तो मैं भी अति साधारण मनुष्यों की भाँति संसार-चक्र में फँसकर जीवन
निर्वाह करता। शिक्षादि के अतिरिक्त क्रांतिकारी जीवन में भी उन्होंने मेरी वैसी ही
सहायता की है, जैसी मेजिनी-5 की उनकी माता ने की थी। यथासमय मैं उन
सारी बातों का उल्लेख करूँगा। माताजी का सबसे बड़ा आदेश मेरे लिए यही था
कि किसी की प्राणहानि न हो। उनका कहना था कि अपने शत्रु को भी कभी
प्राण दंड न देना। उनके इस आदेश की पूर्ति करने के लिए मुझे मजबूरन दो-एक
बार अपनी प्रतिज्ञा भंग भी करनी पड़ी थी।
जन्मदात्री जननी ! इस जीवन में तो तुम्हारा ऋण उतारने के प्रयत्न करने
का भी अवसर न मिला। इस जन्म में तो क्या यदि अनेक जन्मों में भी सारे
जीवन, प्रयत्न करूँ तो भी तुमसे उऋण नहीं हो सकता। जिस प्रेम तथा दृढ़ता के
साथ तुमने इस तुच्छ जीवन का सुधार किया है, वह अवर्णनीय है। मुझे जीवन
की प्रत्येक घटना का स्मरण है कि तुमने जिस प्रकार अपनी देव-वाणी का उपदेश
करके मेरा सुधार किया है। तुम्हारी दया से ही मैं देश-सेवा में संलग्न हो सका।
धार्मिक जीवन में भी तुम्हारे ही प्रोत्साहन ने सहायता दी। जो कुछ शिक्षा मैंने
ग्रहण की उसका भी श्रेय तुम्हीं को है। जिस मनोहर रूप से तुम मुझे उपदेश
करती थीं, उसका स्मरण कर तुम्हारी मंगलमयी मूर्ति का ध्यान आ जाता है और