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रामप्रसाद 'बिस्मिल' की आत्मकथा (काकोरी के अमर शहीद की जेल डायरी व आत्मकथा)

रामप्रसाद 'बिस्मिल' की आत्मकथा (काकोरी के अमर शहीद की जेल डायरी व आत्मकथा)

Autobiography of Ram Prasad Bismil

पं. रामप्रसाद 'बिस्मिल' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा

DevanagariHindipublished128 पृष्ठ

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पृष्ठ 122

110 रामप्रसाद बिस्मिल की आत्मकथा
उपयुक्त नहीं। क्योंकि न जाने किसकी गोली से आदमी मारा गया। अगर डकैती
डालने की जिम्मेदारी के ख्याल से मृत्यु-दंड दिया गया तो चीफ कोर्ट के फैसले
के अनुसार भी मैं ही डकैतियों का जिम्मेदार तथा नेता था, और प्रांत का नेता
भी मैं ही था। अतएव मृत्यु-दंड तो केवल मुझे ही मिलना चाहिए था। अन्य तीन
को फाँसी नहीं देनी चाहिए थी। इसके अतिरिक्त दूसरी सज़ाएँ सब स्वीकार
होतीं। पर ऐसा क्यों होने लगा? मैं विलायती न्यायालय की भी परीक्षा करके
स्वदेशवासियों के लिए उदाहरण छोड़ना चाहता था कि यदि कोई राजनैतिक
अभियोग चले तो वे कभी भूलकर के भी किसी अंग्रेजी अदालत का विश्वास न
करें। तबियत आए तो जोरदार बयान दें। अन्यथा मेरी तो यही राय है कि
अंग्रेजी अदालत के सामने न तो कभी कोई बयान दें और न कोई सफाई पेश
करें। काकोरी षड्यंत्र के अभियोग से शिक्षा प्राप्त कर लें। इस अभियोग में सब
प्रकार के उदाहरण मौजूद हैं। प्रिवी-कौंसिल में अपील दाखिल कराने का एक
विशेष अर्थ यह भी था कि मैं कुछ समय तक फाँसी की तारीख टलवा कर यह
परीक्षा करना चाहता था कि नवयुवकों में कितना दम है और देशवासी कितनी
सहायता दे सकते हैं। इसमें मुझे बड़ी निराशापूर्ण असफलता हुई। अंत में मैंने
निश्चय किया था कि यदि हो सके, तो जेल से निकल भागूँ। ऐसा हो जाने से
सरकार को अन्य तीनों फाँसी वालों की सज़ा माफ कर देनी पड़ेगी और यदि न
करते तो मैं करा लेता। मैंने जेल से भागने के अनेक प्रयत्न किए, किन्तु बाहर
से कोई सहायता न मिल सकी। यही तो हृदय पर आघात लगता है कि जिस
देश में मैंने इतना बड़ा क्रांतिकारी आंदोलन तथा षड्यंत्रकारी दल खड़ा किया था,
वहाँ से मुझे प्राण-रक्षा के लिए एक रिवाल्वर तक न मिल सका। एक नवयुवक
भी सहायता को न आ सका।-⁵⁰ अंत में फाँसी पा रहा हूँ। फाँसी पाने का मुझे
कोई भी शौक नहीं, क्योंकि मैं इस नतीजे पर पहुँचा हूँ कि परमात्मा को यही
मंजूर था। मगर मैं नवयुवकों से फिर भी नम्र निवेदन करता हूँ कि जब तक
भारतवासियों की अधिक संख्या सुशिक्षित न हो जाए, जब तक उन्हें कर्तव्य