रामायण मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - रामायण दार्शनिक महाग्रन्थ एवं सम्पूर्ण चरित्र-मीमांसा)
Ramayana Mimamsa of Swami Karpatri Maharaj
धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंचैत्रषष्ठ्याष्टमीं यावन्महापाश्र्वादिमारणम् ।
चैत्रशुक्लनवम्यां तु सौमित्रेः शक्तिभेदनम् ॥
द्रोणाद्रिराजनेयेन लक्ष्मणार्यमुपाहृतः ।
दशम्यामवहारोऽभूद् रात्रौ युद्धं नृरक्षसोः ॥
एकादश्यां तु रामाय रथो मातलिसारथिः ।
अष्टादशदिने रामो द्वैरथे रावणं वधीत् ॥
द्वादश्याः शुक्लपक्षस्य यावत्कृष्णचतुर्दशीम् ।
माघशुक्लद्वितीयायाश्चैत्रकृष्णचतुर्दशीम् ॥
अष्टाशीतिदिनं युद्धं मध्ये पञ्चदशाहकम् ।
युद्धावहारं संग्रामस्त्रिसप्तविदिनान्यभूत् ॥
संस्कारो रावणदीनाममावास्या दिनेऽभवत् ।
वैशाखादितिथौ रामः सुवेलं पुनरागमत् ॥
अभिषिक्तो द्वितीयायां लङ्काराज्ये विभीषणः ।
सीताशुद्धिस्तृतीयायां देवेभ्यो वरलम्भनम् ॥
वैशाखस्य चतुर्थ्यां तु रामः पुष्पकमास्थितः ।
पूर्णे चतुर्दशे वर्षे पञ्चम्यां माधवस्य तु ॥
भरद्वाजाश्रमं रामः ससीतः पुनरागमत् ।
नन्दिग्रामे तु षष्ठ्यां वै भरतेन समागतः ॥
सप्तम्यामभिषिक्तोऽसावयोध्यायां रघूत्तमः ।
माघ शुक्ल १ को अङ्गद-दौत्य, २ या से सात दिन तक वानरों और राक्षसों का भीषण युद्ध, माघ शुक्ल
९ मी को नागपाशबन्ध, १० मी को गरुड़ द्वारा मुक्ति, दो दिन अवहार, १२ शी को धूम्राक्ष-वध, १३ शी को अकम्पन
का हनुमान् द्वारा वध, माघशुक्ल १४ शी से तीन दिन में प्रहस्तवध, २ या से चतुर्थी तक राम से युद्ध में रावण का
विद्रावणम् । पञ्चमी से ८ मी तक ४ दिनों में कुम्भकर्ण-प्रबोधन । नवमी से १४ शी तक ६ दिनों में कुम्भकर्णवध,
३० अमावस्या को अवहार, फा० शु० १ से ४ तक नरान्तकादिवध, ५ मी से ७ मी तक तीन दिन में अतिकाय-वध,
८ मी से १२ शी तक निकुम्भादि-वध, ४ दिनों में मकराक्ष-वध, फा० कृ० २ या को शक्रजित् की विजय, ३ या को
औषधि आनयन, तदनन्तर ५ दिनों का अवहार ( युद्धबन्दी ), १३ शी से ६ दिन में इन्द्रजित् का वध, ३० अमा०
को रावण की युद्ध यात्रा, चै० शु० ३ या से पाँच दिनों में रावण के प्रधानों का वध, चै० शु० ६ ष्ठी से ८ मी तक
महापाश्र्वादि का वध, शुक्ल ९ मी को लक्ष्मण पर शक्ति औषधपर्वतानयन, १० मी को अवहार, ११ शी को मातलि
आगमन, तदनन्तर १८ दिनों में रावण-वध । इस तरह माघशुक्ल २ या से चैत्रकृष्ण चतुर्दशी तक ८८ दिन तक युद्ध
चला । बीच में १५ दिन अवहार रहा । अमा को रावण-संस्कार हुआ । वैशाख २ या को विभीषण का अभिषेक,
३ या को सीताशुद्धि, चतुर्थी को पुष्पकारोहण, वै० ५ मी को १४ वर्ष पर भरद्वाजाश्रम आगमन, ६ष्ठी को भरतभेंट
और ७ मी को राम का अभिषेक ।
यद्यपि रावण-वध के अनन्तर सीता के दर्शन में विलम्ब होना अस्वाभाविक-सा लगता है तथापि कल्पभेद
से कालगणनाभेद वश अग्निवेश्य-कथा की भी संगति हो सकती है । सर्वथापि ४ दिन में ही युद्धसमाप्ति की बात
असम्भव ही है । अभी अभी बंगलादेश की स्वाधीनता का युद्ध १४ दिनों में समाप्त हुआ है । परन्तु अटकल के आधार
पर कोई कह सकता है कि दो दिन में खुलना, कुष्ठिया आदि पर अधिकार, तीन दिन में चटगाँव, ढाका आदि पर