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सर्वकोश
रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary

महाकवि केशवदास द्वारा

DevanagariHindipublished269 पृष्ठ

पृष्ठ 144, कुल 269 में से

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पृष्ठ 144

( १३८ ) रामचंद्रिका-सटीक ।
मू०-तुम्हैंदेखिदूपैहितूताहिमानै । उदासीनतोसोंसदाताहि
जानै॥ महानिर्गुणीनामताकोनलीजै । सदादासमोपैकृपाक्यों
नकीजै ॥ ६० ॥ अदेवीन्हृदेवीनकीहोहुरानी । करैंसेववानीम-
घौनीमृडानी ॥ लियेकिन्नरीकिन्नरीगीतगावैं । सुकेशीनचैंउर्व-
शीमानपावैं ॥ ६१ ॥ मालिनीछंद ॥ तृणबिचदैबोलीसीयगं-
भीरवानी । दशमुखशठकौलूनकोनकीराजधानी ॥दशरथसुतदे-
षीरुद्रब्रह्मानभासै। निशिचरवपुराबूझ्योनँश्योमुलनासै॥६२॥
अतितनुधनुरेखानैकनाकीनजाकी । खलशरखरधाएक्योंसहै-
तिच्छताकी। बिडकनघनघूरेमक्षिक्योंबाजजीवै।शिवशिरशशि
श्रीकोराहुकैसेसोछीवै ॥ ६३ ॥
टी०-॥ ६० ६१ ॥ पतिब्रतनको परपुरुषसों संभाषण अनुचित हैं तासों तृण कहे
खरको अंतरकरचो यह लोकमर्यादा है अथवा तृण अंतरमें करि या जनायो कि हम
प्राणनको तृण समान समुझे हैं जो तूस्पर्श करिहै तौ प्राण तृण समानछोडि देहैं
अथवा रावणको जनायो कि तू तृणसमानहै काहेते गंभीरवाणी बोली याते कछू भय
नहीं सूचितहोत कोऊ कोऊ तृणअंचलहूको कहत हैं तौ अंचल ओट सों बोली या
जानौं तेरो तो मूल तबही नशिगयोरहै जब हम को हरिल्यायोरहै तामें कछू
लग्यो है ताको ऐसी बातें कहि अवनीकी भाँतिसों काहेको नाशत है ॥ ६२ ॥
तनु कहे सूक्ष्म बिट पुरीष तेरो राज्य सुख बिडकन सदृश है हम बाज सदृश हैं
औ हम शिव शिर शशिसदृश हैं तू राहु सदृश है ॥ ६३ ॥
मू०-उठिउठिशठह्याँतेभागुतौलौं अभागे । ममवचनबिस-
योंसर्पजोलोंनलागे ॥ विकलसकुलदेखौंआसुहीनाशतेरो ।
निपटमृतकतोकोंरोषऔरैनमेरो ॥ ६४ ॥ दोहा ॥ अवधिदई
द्वैमासकी, कह्योराक्षसिनबोलि । ज्योंसमुझैसमुझाइयो, युक्ति
छुरीसोंछोलि ॥ ६५॥ चामरछंद ॥ देखिदेखिकैअशोकराज
पुत्रिकाकह्यो ॥ देहिमोहिंआगितैंजोअंगआगिह्वैरह्यो ॥ ठौर
पाइपवनपुत्रडारिमुद्रिकादई । आसपासदेखिकैउठायहाथकै-