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सर्वकोश
रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary

महाकवि केशवदास द्वारा

DevanagariHindipublished269 पृष्ठ

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पृष्ठ 137

त्रयोदशप्रकाशः १३. ( १३१ )
समुझाइयो, कीन्होंबहुतप्रबोध ॥ ३०॥ दोधकछंद ॥ बोलिल-
येहनुमानतबैलू ॥ ल्यावहुवानरबोलिसबैजू ॥ बारलगैनकहू
बिरमाहीं ॥ एकनकोउरहैघरमाहीं॥३१॥त्रिभंगीछंद ॥ सुग्री-
वसंघातीसुखदुतिरातीकेशवसाथहिसूरनये । आकाशबिलासी
सूरप्रकाशीतबहींवानरआइगये ॥ दिशिदिशिअवगाहनसीतहि
चाहनयूथपयूथसबैपठये । नलिनीलऋच्छपतिअंगदकेसँग
दक्षिणदिशिको बिदाभये ॥ ३२ ॥
टी०-जैसे वृद्धदासीके शुक्ल रोमनकरिके सर्वाङ्ग शुक्लहोतेहैं तैसे याहू शुक्ल है
तासों वृद्धदासी समकह्यो लक्ष्मण संबोधन है ॥ २८ ॥ सत्वर कहे शीघ्र चित्त
चही कहे मनमानी ॥ २९ ॥ ३० ॥ ३१ ॥ साथहि कहे लक्ष्मणके साथहि
रामचन्द्रके पास आइ गये लक्ष्मण इतिशेषः सूरमकाशी कहे सूर्यको ऐसोहै-
प्रकाश जिनको ॥ ३