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राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)

राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)

Rajatarangini of Kalhana with Hindi Translation

महाकवि कल्हण / पं. रघुनाथ सिंह द्वारा

DevanagariHindipublished984 पृष्ठ

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पृष्ठ 965

राजतरंगिणी
1, 186 वसुधाधिपते वाञ्छा° 3, 344
1, 271 वस्त्वन्तरं किमपि तत् 2, 52
2, 150 वाक् मर्मच्छेदिनो दीर्घं 1, 357
3, 465 विक्रमाक्रान्तविश्वस्य 3, 474
3, 477 विक्रमादित्यमुत्सिक्तम् 3, 282
1, 368 विजयेश्वरनन्दीश° 1, 113
3, 337 विजीयते पुण्यबलैः 1, 39
3, 388 वितस्ताया स भूपालो 3, 354
2, 25 विद्यावेश्मानि तुङ्गानि 1, 42
3, 402 विधाय सोऽश्मप्रासादं 1, 148
3, 328 विवेचकतया तस्य 3, 259
] विशा विपाटितारिप्रम् 3, 482
3, 127 विस्तीर्णाः प्रथमे ग्रन्थाः 1, 11
1, 50 विस्मारितो नित्यकृत्यं 1, 125
3, 365 विहाय देहं शेषाहेः 1, 58
3, 478 विहारतूर्यनिर्घोषैः 1, 140
2, 126 विहाराणां सहस्राणि 1, 200
1, 328 विहारे निवसन्म्लेच्छः 1, 199
1, 137 विहितमजगोष्टङ्गाग्राम्या 2, 1
1, 138 वीक्षणं राजदासीना 3, 155
1, 52 वीक्ष्यैतद्विस्मया दृष्ट्या 3, 521
] वृत्तिं स्या यद्व मन्यते हृदि 1, 228
3, 381 वेतालावेदितं लग्नं 3, 351
3, 157 वेधाः परां गुरमुपैति 2, 60
3, 66 वेष्टिताङ्घ्रिः शिरश्शीर्षैः 2, 88
2, 168 वैनग्नं वारि वास्तव्यैः 3, 362
2, 122 वैदेशिको निराशरणो 3, 161
1, 3 वैरिनिर्माशिनं बिम्बे 3, 330
3, 110 व्यपाग्मायामयी राज° 3, 438
1, 192 व्यावृत्य षोडशर्माट° 1, 300
1, 54 व्रतिवेषं तमादिष्ट° 3, 273
2, 56 व्रीडानिगूढनिर्मुन्तो 1, 254
[ श ]
3, 62 शशाङ्कबिम्बमन्दिष्य- 2, 6
3, 316 शत्रुभूरमभून्निभिः 1 30
3, 163 शर्वस्याङ्कगत मुनु- 1, 99
2, 116 शशबन्दुर्भागमन्थोः 1, 92