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राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)

राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)

Rajatarangini of Kalhana with Hindi Translation

महाकवि कल्हण / पं. रघुनाथ सिंह द्वारा

DevanagariHindipublished984 पृष्ठ

पृष्ठ 878, कुल 984 में से

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पृष्ठ 878

[Header] परिशिष्ट ज ७१
में श्रेष्ठ थे । मग ब्राह्मण दक्षिण भारत तक पहुँच गये थे । कूर्म पुराण (४८:३६) तथा महाभारत (६:२)
के अनुसार शकद्वीप के ब्राह्मण मग कहे जाते थे । सदुक्ति कर्णामृत (सन् १२०१ ई०) छह मग ब्राह्मण
कवियों का उल्लेख किया गया है ।
साम्बः सूर्यप्रतिष्ठां च कारयामास तत्त्ववित् ।
उदयाचले च संधित्य यमुनायाश्च दक्षिणे ॥
मध्ये कालप्रियं देवं मध्याह्ने स्थाप्य चोत्तमम् ।
मूलस्थानं ततः पश्चाद् अस्तमानाचले रविम् ॥
स्थाप्य त्रिमूर्ति साम्बस्तु प्रातर्मध्यापराह्निकम् ॥
-साम्ब पुराण २०:३०-३१
कथा है कि साम्ब ने चन्द्रभागा अर्थात् चेनाव के तट पर एक सूर्य मन्दिर स्थापित किया था । नदी
के तट पर उसका आश्रम था । मन्दिर बनकर तैयार हो गया । साम्ब ने भगवान् नारद से मन्दिर के पुरो-
हित किंवा पुजारी के विषय में सलाह ली । किसे पूजा का भार सौंपा जाय । नारद ने कहा । जम्बूद्वीप
के ब्राह्मणों में श्रेष्ठता पूर्व जैसी नही रह गयी है । शकद्वीप से पूजा निमित्त ब्राह्मण बुलाए जाँए ।
गर्हितं मानवं शास्त्रं प्रशंसन्ति ते द्विजाः ।
साम्ब पुराण २६:२०
न योगं परिचर्यायां जम्बूद्वीपे यमानथ ।
मम पूजाकर गत्वा शाकद्वीपादिहानय ॥
-भविष्य पुराण १.१३९
नीलमत पुराण में शक जाति का उल्लेख मिलता है । कश्मीर निवासी शक जाति से परिचित
थे । यथा :
दार्याभिसारगान्धारजुहुण्डुरशकान् खसान् ।
तङ्गणान् माण्डवान् मद्रानन्तर्गिरिबहिर्गिरीन् ॥ ८० = २२२-२२१
× × ×
दार्वीभिसारगान्धारजुहुण्डुरशकाः खसाः ।
तङ्गणा माण्डवाश्चैव अन्तर्गिरिबहिर्गिरिः ॥ १३९ - १८२
× × ×
इतिहासज्ञ तर्न का सुझाव है कि कुछ समय तक कश्मीर के दक्षिणी भाग पर देमित्रियस राज्य करता
था । (तर्न : ग्रीक्स इन बेक्ट्रिया एण्ड इण्डिया: १५५) मिनान्दर अर्थात् मिलिन्द के विषय में भी कतिपय
विद्वानों ने उल्लेख किया है कि कश्मीर मिलिन्द के राज्य में था । मिलिन्द पञ्ह का संवाद राजा मिलिन्द
तथा नागार्जुन में केवल कश्मीर से बोस योजन दूर पर हुआ था । कश्मीर के इतिहास के ग्रीक तथा मिलिन्द
के कश्मीर भूमि के राज्य करने का कहीं उल्लेख नहीं मिलता । प्रसिद्ध राजा तूरमाण शक था ।
असुर देश अर्थात् असीरिया के सन् ८४३ वर्ष ई० पू० के एक आलेख में 'माद' जाति का उल्लेख मिलता
है । उनका पार्स जाति के साथ उल्लेख किया गया है । मग ईरानी पुरोहित वाचक शब्द मगुश का अपभ्रंश
है । आगे चलकर यह शब्द अपभ्रंश होकर 'मोवज' रूप से प्रयुक्त होने लगा । मगपति अर्थात् प्रधान पुरोहित