राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)
Rajatarangini of Kalhana with Hindi Translation
महाकवि कल्हण / पं. रघुनाथ सिंह द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपरिशिष्ट घ २९
महाभारत में दानव राज कलिय का वर्णन मिलता है। कलिय की संज्ञा कालिय नाग से दी गयी
है। (महा० : वनपर्व : १०१ : ७)
कलियं इति विख्यातो गणः ।
तैश्च वृत्तं समाधित्य जगत्सर्वं ॥ मय : ३:१०१ : ७
अथर्व वेद ५:१३, ५:५, ४:५६ तथा १५.१३ में वृत्र काउल्लेख आता है। तैत्तिरीय संहिता काण्ड ४
प्रपाठक २ अनुवाक २ में उल्लेख है। छान्दोग्योपनिषद् ८.१ ४ में असुर विरोचन का वर्णन आत्मा के प्रसंग
में आता है।
सुर एवं असुर के सिद्धान्तों में मूल भेद यह था कि असुर शरीर को आत्मा मानते थे। सुर अर्थात्
देवता लोग आत्मा को शरीर से भिन्न समझते थे। सुर-असुर एक ही आर्य जाति की सन्तान थे। सैद्धान्तिक
तथा दार्शनिक मतभेदों के कारण दो वर्ग कालान्तर में हो गये थे।
आश्वलायन गृह्यसूत्र ३ : कण्डिका १३ तथा पारस्कर गृह्य सूत्र काण्ड २ कण्डिका १४ में इसका
उल्लेख मिलता है।
रामायण में नाग जाति का उल्लेख मिलता है। भोगवती नगरी नाग राजाओं की राजधानी थी।
उसपर रावण ने विजय प्राप्त किया था।
सर्वाद्धियाख्यांश्चा यज्ञविघ्नकरं सदा।
पुरीं भोगवतीं गत्वा पराजित्य च वासुकिम् ॥
—वा० रा० कि० सर्ग १२ : १३
सुमहत्वां बलं कस्माद् विषादं मजते भवान्।
त्वया भोगवतीं गत्वा निर्जिता पन्नगा युधि ॥
—वा० रा० युद्धकाण्ड सर्ग ७ : ८
स तु भोगवतीं गत्वा पुरीं वासुकिपालिताम् ।
कृत्वा नागान् वशे हृष्टो ययौ मणिमयीं पुरीम् ॥—वा० रा० उ० सर्ग २३ : ५
नागो के रहने का स्थान, पाताल, रसातल तथा समुद्र कहा गया है। समुद्र में रहने का अर्थ यह
नही है कि जल के भीतर रहते थे बल्कि समुद्र तटवर्ती किंवा समुद्र आवृत प्रदेश द्वीप अथवा भूखण्ड में
निवास करते थे।
तं कालमेघप्रतिमं महोरगनिषेवितम्।
अभिगम्य महानादं तीर्थेनैव महोदधिम् ॥—वा० रा. कि० सर्ग ४० : २८ ॥
रावण ने नाग जाति पर विजय किया था। वह जाति सुसभ्य तथा नगरों में भी रहने वाली थी।
यदि वे शक्तिशाली नही होते, उनका तत्कालीन राजनीतिक जीवन में प्रमुख स्थान न होता तो रावण उन
पर विजय पाकर गौरवान्वित किस प्रकार होता। निस्सन्देह नाग एक मानव जाति थी। (रामा० : सुन्दर :
१२ : २१-२२ )
महाभारत में नाग यज्ञ; नाग द्वारा राजा परीक्षित की मृत्यु एवं खाण्डव वनदाह का विस्तृत
वर्णन मिलता है। महाभारत के अनुसार नाग एक मानव जाति थी। तक्षक नाग इस जाति का
राजा था। तक्षक के मित्र इन्द्र ने खाण्डव दाह रोकने का प्रयास किया था किन्तु सफल नहीं हुए। नाग राज