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राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)

राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)

Rajatarangini of Kalhana with Hindi Translation

महाकवि कल्हण / पं. रघुनाथ सिंह द्वारा

DevanagariHindipublished984 पृष्ठ

पृष्ठ 775, कुल 984 में से

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पृष्ठ 775

५९० राजतरंगिणी
आरोग्यशाला निरघाऽप्युल्लाघत्वाय रोगिणाम् ।
तेन सेनामुखीदेवीभयशान्त्यै च कारिता ॥४६१॥
४६१. उसने रोगियों के आरोग्य एवं सेनामुखी देवी के भय शान्ति हेतु सुन्दर
आरोग्यशाला' स्थापित किया ।
नीलमत पुराण में प्रद्युम्न नाग का उल्लेख
मिलता है ।
सूनौ द्वौ सुपाश्र्वेश्च सुनासः पञ्चहस्तकः ।
प्रद्युम्नश्चाम्धकः शम्भुः साल्वो मूलेश्वरो घपः ॥
888 = १०५८
योग वासिष्ठ रामायण में हरपर्वत शिखर किंवा
शारिका पर्वत शिखर को प्रद्युम्न शिखर कहा गया
है । ( स्थिति प्रकरण : सर्ग : ३२ : श्लोक : १२ )
पुराणों में तीन प्रद्युम्न नामक व्यक्तियों का
वर्णन मिलता है । भागवत पुराण ( ४ : १३ : १६)
के अनुसार प्रद्युम्न एक राजा था। वह चक्षुर्मनु के
बारह पुत्रों में से एक था । इसकी माता का नाम
नड्वला था । सुद्युम्न भी इसका एक नामान्तर है ।
वायुपुराण के अनुसार प्रद्युम्न एक राजा था ।
यह भानुमत् राजा का पुत्र था ।
महाभारत अनुशासन पर्व के अनुसार प्रद्युम्न
श्रीकृष्ण का पुत्र था । उसकी माता का नाम
रुक्मिणी था । सनत्कुमार का अंश था ।
यह पूर्व जन्म में मदन था। शम्बरासुरका वध
करने के लिये अवतार लिया था । शम्बरासुर की
स्त्री मायावती पूर्व जन्म में प्रद्युम्न की पत्नी रति
थी । पूर्व जन्म में मदन की मृत्यु के पश्चात् उसकी
स्त्री रति को शम्बरासुर हर ले गया था । शम्बरा-
सुर से बदला लेने के लिये प्रद्युम्न का अवतार लिया
था । शम्बरासुर तथा प्रद्युम्न की कथा विष्णु,
भागवत, हरिवंश तथा ब्रह्मवैवर्त पुराणों में भिन्न
भिन्न रूप से दी गयी है। प्रद्युम्न-शाल्व युद्ध का
भागवत १०:९०:३३ तथा महाभारत वनपर्व
१५:१०-३२; १७:२५; १८:३; १५, १६६;
२०:; १०; ७६; १३ में विस्तारपूर्वक वर्णन
किया गया है ।
यादव वंश संहार के समय भोजों के सम्म
प्रद्युम्न मृत हुआ । ( म० मो० : ४ : ३३;
भा ११ : ३० : १६; गणेश : १ : ४९ ) मृत्युके
अनन्तर वह सनत्कुमार के स्वरूप में प्रविष्ट हो गया ।
प्रद्युम्न की मायावती पत्नी के अतिरिक्त
रुक्मिन की कन्या रुक्मावती अथवा शुभांगी से इसने
विवाह किया था। ( भा० १० : ६१ : १८;
८० : १६ ; ) शुभांगी से इसको अनिरुद्ध नामक
पुत्र हुआ था ।
४६१ (१) आरोग्यशाला : अस्पताल का अर्थ
आरोग्यशाला है । कल्हण प्राचीन काल में सार्व-
जनिक आरोग्यशाला होने का उल्लेख करता है ।
कल्हण के इस वर्णन ने इतिहास को एक
टूटी श्रृंखला की कड़ी को जोड़ा है । आयुर्वेद एवं
आयुर्विज्ञान भारत में अत्यन्त विकसित था । तक्षशिला
तथा काशी इस विद्या के केन्द्र थे । बौद्ध काल में
समस्त भारतवर्ष तथा विदेश से विद्यार्थी आयुर्वेद
चिकित्सा पद्धति सीखने तथा ज्ञान प्राप्त करने
के लिये तक्षशिला जाते थे । भगवान् बुद्ध
का प्रसिद्ध चिकित्सक जीवक राजगृह से तक्षशिला
में आकर शिक्षा प्राप्त किया था ।
उस समय आजकल के समान सार्वजनिक
अस्पताल भी होते थे यह बात कल्हण के उक्त
उल्लेख से स्पष्ट होती है। राजतरंगिणी में आरोग्य-
शाला स्थापित करने का यह प्रथम उल्लेख
मिलता है ।