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राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)

राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)

Rajatarangini of Kalhana with Hindi Translation

महाकवि कल्हण / पं. रघुनाथ सिंह द्वारा

DevanagariHindipublished984 पृष्ठ

पृष्ठ 674, कुल 984 में से

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पृष्ठ 674

तृतीय तरंग ५१३
इदं संचिन्तयन्सोऽभूत्सेव्ये तस्मिन्निरादरः ।
खिन्नस्य हि विपर्येति तत्त्वज्ञस्यापि शेमुषी ॥ २०३ ॥
२०३. यह सोचते हुए, वह सेव्य इस (नृप) के प्रति आदर रहित हो गया। तत्त्वज्ञ
खिन्न की बुद्धि निश्चय ही विपरीत हो जाती है।
प्रभातायां विभावर्यामथाऽऽस्थानस्थितो नृपः ।
आकार्यतां मातृगुप्त इति क्षत्तारमादिशत् ॥ २०४ ॥
२०४. जब विभावरी के प्रभात होने पर, सभास्थान पर पहुँचकर, राजा ने क्षत्ता को
यह आदेश दिया, —'मातृगुप्त को बुलाओ -
ततः प्रधावितानेकप्रतीहारप्रवेशितः ।
प्रविवेश महीभर्तुस्त्यक्ताश इव सोऽन्तिकम् ॥ २०५ ॥
२०५. तब अनेक प्रतीहारी दौड़कर, उसे ले आये और निराश सदृश वह, नृपति के
समीप (सभाभवन में) प्रवेश किया।
तस्मै कृतप्रणामाय मुहूर्तादिव पार्थिवः ।
भ्रूसंज्ञितेन व्यतरल्लेखं लेखाधिकारिणा ॥ २०६ ॥
२०६. प्रणाम करने वाले, उसे तत्क्षण पार्थिव ने भ्रूसंकेतित¹ लेखाधिकारी द्वारा
लेख प्रदान किया।
स्वयं च तमुवाचाङ्ग कश्मीरान्वेत्सि किं भवान् ।
गत्वा तत्राधिकारिभ्य एतच्छासनमर्प्यताम् ॥ २०७ ॥
२०७. 'अंग¹ ! क्या आप कश्मीर को जानते हैं? वहां जाकर, यह शासन ² पत्र
अधिकारियों को अर्पण कीजिए।
पाठभेद : प्रथा केवल इतिहास एवं साहित्य की सामग्री रह
श्लोक संख्या २०४ में 'क्षत्तारं' का पाठभेद गयी है।
'द्वारस्थं' मिलता है। २०७ (१) अंग : यह सम्बोधनवाचक
पादटिप्पणियाँ : अव्यय शब्द है। इसका अर्थ बहुत अच्छा होता है।
२०६ (१) भ्रूसंकेतित : प्राचीन काल में धीमान् बहुत ठीक, 'अवश्य' 'सत्य है' 'अंगीकार है'
पुराने विचार के राजा लोग स्वयं मुख से आज्ञा होता है।
नहीं देते थे। केवल उनके संकेत से मन्त्री तथा (२) शासन : शासन का अर्थ यहां आज्ञापत्र
सचिव आदेश का कार्य जान जाते थे। और किंवा फारसी का प्रचलित शब्द फरमान है। पाद-
राजाज्ञा प्रसारित करते थे। टिप्पणी १५ (१) पृष्ठ १२ तथा तरंग ४ :
मैने काठिराज को इस प्रकार का संकेत तथा ३२१; ८ : २६२५, द्रष्टव्य है। शासन पत्र लिखने
व्यवहार करते देखा है। अब भारत में सभी देशी तथा उसके रखनेवालों को लेखाधिकारी कहा
राज्यों का विलय हो गया है। यह अत्यन्त प्राचीन जाता था।
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