सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)

राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)

Rajatarangini of Kalhana with Hindi Translation

महाकवि कल्हण / पं. रघुनाथ सिंह द्वारा

DevanagariHindipublished984 पृष्ठ

पृष्ठ 395, कुल 984 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 395

५६२ राजतरंगिणी
अथ म्लेच्छगणाकीर्ण मण्डले चण्डचेष्टितः ।
तस्याऽऽत्मजोऽभून्मिहिरकुलः कालोपमो नृपः ॥ २८६ ॥
मिहिरकुल :
२८६. म्लेच्छ १ गणों से मण्डल आकीर्ण होने पर उसका लड़का चण्डचेष्टा, काल स्वरूप
मिहिरकुल २ राजा हुआ ।


से बादशाहत करके दुनिया से रुखसत हुआ ।
(२) हिरण्योत्स : इस स्थान का पता नहीं
चलता।
(३) वसुकुल : आइने अकबरी में नाम 'हवि-
दकह' तथा उसका राज्यकाल ६० वर्ष दिया गया है।
हसन कहता है— राजा 'बस: कुल' राजा हरन्यगुस
का बेटा था । इसने भी साठ साल हुकूमत किया ।
लौकिक वर्ष २३१२ में कश्मीर के राज्य सिंहासन
पर बैठा होगा ।
२८९ (१) म्लेच्छ : पाँचवीं शताब्दी के प्रयोग
में आमू दरया के उपत्यका के हूण जुअन जाति से
मुक्ति पाकर शक्तिशाली हो गये । शासकों के
वंश के कारण येथा-इफथेलाइट कहे जाने लगे ।
यूनानियों ने इन्हे श्वेत हूण कहा है। यही शब्द
आज प्रचलित हैं । यहाँ म्लेच्छ शब्द से इफथे-
लाइट हूणों से तात्पर्य हैं । इन हूणों ने आमू दरया
के समीपवर्ती प्रदेशो पर अपना राज्य स्थापित
किया था । यूनानी बौद्ध सभ्यता का अफगानिस्तान
में नाश किया । उत्तरी भारत में राज्य विस्तार
कर स्यालकोट को अपनी राजधानी बनाया। भागवत
पुराण के अनुसार हूणो पर भरत ने अपनी
दिग्विजय यात्रा में विजय प्राप्त की थी । (भागवत
९ २० : ३०) । मत्स्य पुराण में १९ हूणों का
वर्णन मिलता है । (मत्स्यपुराण २७२ : ९)
हसन लिखता है—'राजा मिहिरकुल राजा
वसुकुल का बेटा था । क० २३३६ में हकूमत का
झण्डा बुलन्द किया । खुदा का खौफ न होने
और बेरहमी और ग़ज़बनाकी में बेमिशाल था ।
थोड़े जुर्म पर कत्ल करने से गुरेज नहीं करता था ।
किसी दिन भी खून रेज़ी के बग़ैर चैन न लेता ।
रहम करने के नाम व निशान का उसको पता
तक न था । परिन्दे और चरिन्दे मक़तूलों के
गोश्त की उम्मीद में उसके साथ-साथ जाया
करते थे । इसके जमाने में तुरकिस्तान के एक
हाकिम ने कश्मीर पर हमला कर दिया । राजा
ने इन्तहाई जवाँ मरदी, बहादुरी और इस्तकलाल
के साथ उसके हमला का मुंहतोड़ जवाब दिया ।
जिसके नतीजा में बहुत से सिपाही मक़तूल और
जख्मी हुए । बिल आखिर शिकस्त खाकर भाग
गया । चन्द्रकुल नाम की एक नहर परगना
खादिर पारा में खुदवायी । दौरान खुदाई में
कोह आसार व अगर के पुश्ता में एक बड़ा भारी
पत्थर सदराह हो गया और किसी भी तदवीर
और हीला से अपनी जगह से न हिला । यह
देखकर राजा को सख्त फिक्र हुई । पूजापाठ
के बाद ख्वाब में एक आदमी देखा । जो उससे
कह रहा था कि हर वह औरत जो गुनाह बद-
कारी से पाक व साफ होगी जब इस पत्थर पर
हाथ रखेगी तो वह फौरन मादूम हो जायगा ।
राजा ने इसी इल्हाम के बमूजिब हर तरफ से
औरतो की जमायतों को अहद करवाया । लेकिन
किसी एक के भी हाथ लगने से वह पत्थर
अपनी जगह से न हिला । राजा निहायत गज़ब-
नाक हुआ और औरतों को जिनारकारी और बच्चों
को हरामजदगी और मर्दों का बेबस और बेहयाई
के बहाने से कत्ल आम कर दिया ।
कैफियत—'मोरखों ने औरत, बच्चे और मर्द
मक़तूलांन की तादाद तीन करोड़ लिखी है लेकिन
बाज तीन लाख तक खयाल करते हैं ।
'आखिरकार चन्द्रवती जो एक कुम्हार की
लड़की थी हाजिर हुई । उसने राजा को बड़े गुस्सा