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राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)

राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)

Rajatarangini of Kalhana with Hindi Translation

महाकवि कल्हण / पं. रघुनाथ सिंह द्वारा

DevanagariHindipublished984 पृष्ठ

पृष्ठ 136, कुल 984 में से

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पृष्ठ 136

प्रथम तरंग ५७
उद्गतास्तनिष्यन्ददण्डकुण्डाऽऽतपत्रिणा ।
यत् सर्वनागाऽधीशेन नीलेन परिपाल्यते ॥ २८ ॥
२८. पवित्र वितस्ता १ मृणाल दंड तथा विशालकुंड २ कमल पत्र तुल्य था । उसके ३ कमल
पत्र छत्र तथा मृणाल दंड धारी नागाधीश नील द्वारा वह मंडल परिपालित हुआ ।
अबुल फजल ने आइने अकबरी में इसका वर्णन
किया है । उस समय इसकी गणना पवित्र स्थानों में
की जाती थी । कुंड की पूर्व दिशामें स्थित वह पत्थर
के बने हिंदू मन्दिरों का होना लिखता है। जहाँगीर
ने अपनी आत्मकथा में नवीन निर्माण करने के पूर्व
कुंड का चौकोर तथा उसके ऊपर आथभों का होना
लिखा है ।
सन् १३३६ ई० के पश्चात् काश्मीर में मुस्लिम
शासन स्थापित हुआ । मुगल सम्राट् अकबर के पूर्व
काश्मीर में गैर काश्मीरी मुसलिमों का शासन नहीं
हुआ था । काश्मीरी मुस्लिम शासन में कश्मीर लग-
भग ३०० वर्षों तक रह चुका था । काश्मीरी जनता
इस्लाम धर्म ग्रहण कर चुकी थी । हिंदुओं की
आबादी नगण्य थी । सभी तीर्थस्थान एवं मंदिर नष्ट
भ्रष्ट हो चुके थे । मंदिरों के स्थान पर जियारतें तथा
मस्जिदें बन चुकी थी । नील कुंड इसका अपवाद
नहीं था ।
संवत् १९९९ विक्रमीयमें खनन द्वारा यहाँ से
प्राप्त मूर्तियां इस बात की प्रमाण हैं कि यह स्थान
महत्त्वपूर्ण तीर्थ था । कुंड अत्यंत प्राचीन काल से
वर्तमान था । जहाँगीर तथा शाहजहाँ ने उसका
मुगल शैली पर जीर्णोद्धार किया था । इस स्थान पर
हिंदू शैली का किस प्रकार का मंदिर अथवा निर्माण
था अनुमान लगाना कठिन है । मूर्तियाँ यहाँ से प्राप्त
जो हुई हैं उस पर गांधार शैली की अपेक्षा भारतीय
मूर्तिकला शैली का अधिक प्रभाव है । वितस्ता नदी
को बरनियर फ्रान्स की सीन नदी से और काश्मीर के
पर्वतों की तुलना अलाइम्पस से करता है ।
पाठभेद :
'निष्यद' शब्द का पाठभेद 'निष्यन्द' तथा
'निःस्यन्द' मिलता है । इसी प्रकार 'धीगेन' का पाठ-
भेद 'देवेन' मिलता है ।
पादटिप्पणियाँ.
२८ ( १ ) वितस्ता : वर्तमान झेलम नदी ।
अनुशासन पर्व महाभारत के २५वें अध्याय में
पितामह भीष्म ने युधिष्ठिर को अंगिरा ऋषि के
वचनों का उल्लेख करते हुए कहा कि चन्द्रभागा
और वितस्ता में स्नान करने से लोग पापमुक्त हो
जाते हैं । वितस्ता का दूसरा नाम पार्वती है ।
भादों शुक्ल त्रयोदशी को वितस्ता जन्मोत्सव मनाया
जाता है ।
( २ ) कुंड : वीर नाग, बैरी नाग, नील
नाग, किंवा नील कुंड से यहाँ तात्पर्य है । नील कुंड
का उल्लेख नीलमत पुराण में किया गया है ।
नीलकुण्डे वितस्ताख्यं शूलघातं तथैव च ।
तीर्थं त्रिनामकं दृष्ट्वा स्वर्गलोके महीयते ॥
१२८४ : १५००
तथा विनशनं प्राप्तं फले वाजपेयफलं लभेत् ।
ब्राह्मणेकुण्डिकायां च नीलकुण्डे च पार्थिव ॥
१२८९ : १२८९
( ३ ) कमल पत्र और मृणाल दण्ड : कल्हण
की यह उपमा उपत्यका का प्राकृतिक सुरम्य दृश्य उप-
स्थित करती है । शंकराचार्य शिखर से उपत्यका देखी
जाय तो वह भूमि पर रखे मृणाल-युक्त पद्म पत्र
तुल्य सुशोभित दिखाई देगी । कल्हण ने कुंड शब्द
का प्रयोग किया है । डल लेक को कुंड मान लिया
जाय तो उपमा ठीक बैठती है । छत्र मंत्रपात्र नाग