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रैदास जी की बानी (सन्त रविदास - बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सम्पूर्ण साखी व पद)

रैदास जी की बानी (सन्त रविदास - बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सम्पूर्ण साखी व पद)

Raidas Ji Ki Bani: Belvedere Steam Printing Press Allahabad

सन्त रविदास / रैदास (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished52 पृष्ठ

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नों का टहर बनाये हुए है जिसका उसे अधिकार नहीं है इसलिये दंड`

  • Look at 'वाम्हनों': yes, 'वाम्हनों'.
  • Look at 'टहर': wait, look at 'टहर' vs 'टहल':
    Wait, is that a 'ह'? Wait, could it be 'टहल' or 'टहर'? Look at the second letter: it's definitely 'ह'. Third letter: 'र'. Let's write 'टहर'.
  • Look at 'जिसका' : wait, after 'जिसका' there is a comma: 'जिसका,'.
  • Look at 'इसलिये' : 'इसलिये'.
  • 'दंड' : 'दंड'.

Line 20: का भागी है। राजा ने रैदास जी को बुलाकर हाल पूछा और उनके वचन

Line 21: से ऐसा प्रसन्न हुआ कि दंड देने के बदले बड़ा आदर किया।

  • 'बड़ा' or 'बड़ा'? It's 'बड़ा'.

Line 22: भक्तमाल में लिखा है कि चित्तौड़ की रानी ने जो काशी में यात्रा के लिये

  • 'काशी में यात्रा' : there is a small vertical dash under 'में'? No, between 'काशी' and 'यात्रा' there is 'में'.

Line 23: आई थी रैदास जी की महिमा सुनकर उनको अपना गुरू बनाया। यह गति

  • 'गुरू' : 'गुरू' (or 'गुरु'? It has a loop: 'ग