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सर्वकोश
रघुवंशम् (मल्लिनाथ संजीवनी व श्रीकृष्णमणि त्रिपाठी हिन्दी व्याख्या)

रघुवंशम् (मल्लिनाथ संजीवनी व श्रीकृष्णमणि त्रिपाठी हिन्दी व्याख्या)

Raghuvamsham of Kalidasa Hindi

महाकवि कालिदास द्वारा

स्रोत: Raghuvamsham with Mallinatha Sanjivani & Hindi Commentary by Dr. Shrikrishnamani Tripathi (उद्गम)

DevanagariHindipublished735 पृष्ठ

पृष्ठ 704, कुल 735 में से

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पृष्ठ 704

श्लोकानुक्रमणिका

६४५

| सर्ग | श्लोकः | | सर्ग | श्लोकः |
| :--- | :---: | :---: | :--- | :---: | :---: |
| इतस्ततश्च वैदेहीम | १२ | ५९ | इत्युक्तवन्तं जनकात्म | १४ | ४३ |
| इति क्रमात्प्रयुञ्जानो | १७ | ६८ | इत्युक्त्वा मैथिलीं भर्तु | १२ | ३८ |
| इति क्षितीशो नवतिं न | ३ | ६९ | इत्युद्गताः पौरवधू | ७ | १६ |
| इति जित्वा दिशो जिष्णु | ४ | ८५ | इत्यूचिवानुपहताभरणः | १६ | ८६ |
| इति प्रगल्भं पुरुषा | २ | ४१ | इदमुच्छ्वसितालकं | ८ | ५५ |
| इति प्रगल्भं रघुणा स | ३ | ४७ | इन्दीवरश्यामतनु | ८ | ६५ |
| इति प्रतिश्रुते राज्ञा | १५ | ७४ | इन्दोरगतयः पद्मे | १७ | ७५ |
| इति प्रसादयामासुस्ते | १० | ३३ | इन्द्राद्वृष्टिनिर्यमितगदो | १७ | ८१ |
| इति वादिन एवास्या | १ | ८२ | इन्द्रियार्थपरिशून्यम | १९ | ६ |
| इति विज्ञापितो राज्ञा | १ | ७३ | इमां तटाशोकलतां च | १३ | ३२ |
| इति विरचितवाग्भिः | ५ | ७५ | इमां स्वसारं च यवीय | १६ | ८५ |
| इति विस्मृतान्यकरणीय | ९ | ६९ | इयमप्रतिबोधशायि | ८ | ५८ |
| इति शत्रुपु चेन्द्रियेषु | ८ | २३ | इप्सितं तदवज्ञाना | १ | ७९ |
| इति शिरसि स वामं | ७ | ७० | उ | | |
| इति संत्यज्यं शत्रुघ्नं | १५ | १९ | उत्खातलोकत्रयकण्टके | १४ | ७३ |
| इति स्वसुर्भोजकुलप्र | ७ | २९ | उत्तस्थुषः सपदि पल्व | ९ | ५९ |
| इत्थं क्षितीशेन वशी | २ | ६७ | उत्तिष्ठ वत्सेत्यमृता | २ | ६१ |
| इत्थं गते गतघृणः | ९ | ८१ | उत्तिष्ठ वत्से ननु सानु | १४ | ६ |
| इत्थं जनितरागासु | १७ | ४४ | उत्थापितः संयति रेणु | ७ | ३९ |
| इत्थं द्विजेन द्विजराजं | ५ | २३ | उदकप्रस्थे स्थिरधीः | १५ | ९८ |
| इत्थं नागस्त्रिभुवनगु | १६ | ८८ | उदधेरिव रत्नानि | १० | ३० |
| इत्थं प्रयुज्याशिषम | ५ | ३५ | उदयमस्तमयं च | ९ | ९ |
| इत्थं व्रतं धारयतः | २ | २५ | उदये मदवाच्यमुज्झ | ८ | ८४ |
| इत्यध्वनः कैश्चिदहोभि | १६ | ३५ | उदायुधानापततस्तो | १२ | ४४ |
| इत्यपास्तमखविघ्नयो | ११ | ३० | उद्बन्वकेशश्च्युतपत्र | १६ | ६७ |
| इत्यर्घ्यपात्रानुमित | ५ | १२ | उद्गच्छमाना गमनाय | १६ | २९ |
| इत्याप्तवचनाद्रामो | १५ | ४८ | उद्यतैकभुजयष्टिमा | ११ | १७ |
| इत्या प्रसादादस्यास्त्वं | १ | ९१ | उन्नाभ इत्युद्गतनाम | १८ | २० |
| इत्यारोपितपुत्रास्ते | १५ | ९१ | उन्मुखः सपदि लक्ष्मणा | ११ | २६ |