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सर्वकोश
पूर्णप्रज्ञ भाष्य (श्रीमन् मध्वाचार्य - द्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य जगन्नाथदीपिका सटीक)

पूर्णप्रज्ञ भाष्य (श्रीमन् मध्वाचार्य - द्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य जगन्नाथदीपिका सटीक)

Purnaprajna Bhashya of Sriman Madhvacharya with Commentary

श्रीमन् मध्वाचार्य (टीकाकार: जगन्नाथ यति / गोपालकृष्णाचार्य) द्वारा

DevanagariHindipublished1,267 पृष्ठ

पृष्ठ 348, कुल 1267 में से

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पृष्ठ 348

णे-न!
The 'णे' has the e-matra, and 'न' is just 'न'!
And there is just a slight space between 'णे' and 'न' due to movable type spacing: "लप्रमाणे न" or "लप्रमाणेन"!
Of course! "मूलप्रमाणेन भाव्यम्"!

Line 12 end: "अन्य-"
Line 13:
"थाऽनाश्वासाद्यज्ञादेः पुण्यसाधनतादिबोधकवेदमूलं च भवत्प्रत्यक्षा-"
End of line 13: "भवत्प्रत्यक्षा-"

Line 14:
"नुमानयोरसम्भवात्परिशेषाद्वाक्यमेवेति वाच्यम्, तस्य चानित्यता-"
End of line 14: "चानित्यता-"

Line 15:
"मुपेत्य मूलान्वेषणेऽनवस्थापत्त्या नित्यत्वमेव वाच्यम्, ततो वरं वेद-"
End of line 15: "वेद-"

Line 16:
"स्यैव नित्यत्वाङ्गीकरणम्, श्रुतिसिद्धत्वादिति ॥"

Line 17:
"( ९ ) न तु यथा वेदानित्यत्वे आप्त्यनिश्चयात्प्रामाण्याभावापत्ति-"
End of line 17: "भावापत्ति-"

Line 18:
"र्बाधिका, तथा तस्य नित्यत्वेऽप्याप्तोक्तत्व