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सर्वकोश
पूर्णप्रज्ञ भाष्य (श्रीमन् मध्वाचार्य - द्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य जगन्नाथदीपिका सटीक)

पूर्णप्रज्ञ भाष्य (श्रीमन् मध्वाचार्य - द्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य जगन्नाथदीपिका सटीक)

Purnaprajna Bhashya of Sriman Madhvacharya with Commentary

श्रीमन् मध्वाचार्य (टीकाकार: जगन्नाथ यति / गोपालकृष्णाचार्य) द्वारा

DevanagariHindipublished1,267 पृष्ठ

पृष्ठ 211, कुल 1267 में से

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न्वयः).
Look at the letter after त्य:
It is:
न् (n) + व (va) ?
Wait, if it's "धारयाम्यित्यन्वयवाक्यार्थः", is there a word "अन्वयवाक्यार्थः"?
No, look at:
धारयाम्यित्य (dha-ra-ya-myi-tya)
न्व (nva)
य (ya) -> wait, there is a 'य'!
Wait, is there 'न्व' and 'य'?
Let's look at L28:
... सामर्थ्येन धारयाम्यित्यन्वयवाक्यस्यार्थः ???
Wait, let's look at the character after 'त्य':
It has a vertical line, with a left loop.
Wait, let's compare:
Line 22: तां स्मृतिमुदाहरति-स्मृतेश्चेति ॥ इत्यादिस्मृतेश्च सर्वत्रोच्य
Line 23: मानो नारायण एवेत्यन्वयः । (look at 'एवेत्यन्वयः'!)
In Line 23:
ए (e)
वे (ve)
त्य (tya)
न्व (nva)
यः (yah)
Look at "त्यन्वयः" in Line 23!
Now look at Line 28:
त्य (tya)
न्व (nva)
य (ya)
वा (vaa)
क्य (kya)