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पृथ्वीराजविजय महाकाव्यम् (कवि जयानक - अजमेर चौहान साम्राज्य एवं सम्राट् पृथ्वीराज इतिहास)

पृथ्वीराजविजय महाकाव्यम् (कवि जयानक - अजमेर चौहान साम्राज्य एवं सम्राट् पृथ्वीराज इतिहास)

Prithvirajavijaya Mahakavya of Jayanaka with Commentary

कश्मीरी कवि जयानक (टीकाकार: जोनरराज) द्वारा

DevanagariHindipublished330 पृष्ठ

पृष्ठ 46, कुल 330 में से

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पृष्ठ 46

– ᴗ ᴗ – ᴗ – –
Wait:
त-गण: – – ᴗ
त-गण: – – ᴗ
ज-गण: ᴗ – ᴗ
ग-ग: – –
Wait: त त ज ग ग = Upajati / Indravajra is: त त ज ग ग (– – ᴗ, – – ᴗ, ᴗ – ᴗ, – –)
Wait! Indravajra:
स्यादिन्द्रवज्रा यदि तौ जगौ गः!
तौ = त-गण, त-गण (– – ᴗ, – – ᴗ)
ज = ज-गण (ᴗ – ᴗ)
गौ = ग, ग (–, –)
Total = 3 + 3 + 3 + 2 = 11 syllables!
Let's check if Indravajra fits:
Line 3: सम्बन्धिना वार्णवसप्तकस्य

  1. सम् (–)
  2. बन् (–)
  3. धि (ᴗ)
    -> त-गण (– – ᴗ)
  4. ना (–)
  5. वार् (–)
  6. ण (ᴗ)
    -> त-गण (– – ᴗ)
  7. व (ᴗ)
  8. सप् (–)
  9. त (ᴗ)
    -> ज-गण (ᴗ – ᴗ)
  10. कस्य (क is – due to sy, and final syllable is –):