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पृथ्वीराजविजय महाकाव्यम् (कवि जयानक - अजमेर चौहान साम्राज्य एवं सम्राट् पृथ्वीराज इतिहास)

पृथ्वीराजविजय महाकाव्यम् (कवि जयानक - अजमेर चौहान साम्राज्य एवं सम्राट् पृथ्वीराज इतिहास)

Prithvirajavijaya Mahakavya of Jayanaka with Commentary

कश्मीरी कवि जयानक (टीकाकार: जोनरराज) द्वारा

DevanagariHindipublished330 पृष्ठ

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दशमः सर्गः . २५७
श्रीश्रीकण्ठचरित्रकाव्यविवृतौ विश्रस्य निश्वस्य च
च्छायाभाजि किरातकाव्यविवृतौ(1.21) विश्रम्य रम्यश्रियि .
पृथ्वीराजजयाख्यकाव्यविवृतौ संवेशमिच्छाम्यहं
शांखक्षोदजखेदमेदु(1.22)रमतिर्ज्योत्स्नाकरो लावणिः ॥
श्रीलोलराजसुतपण्डितभट्टनोन-
राजात्मजो विवरणेन स जोनराजः .
सर्गं चकार दशमं सुखमत्र पृथ्वी-
राजाख्यराजविजयाभिधकाव्यराजे ॥(1.24)
पृथ्वीराजविजयविवरणे श्रीजोनराजकृते दशमस्सर्गः ॥⁴

1 Ms. °दृमशा°. 2 Ms. °तिज्यो°. 3 Ms. °राजविव°. 4 Ms. ॐ नमश्शिवाय.
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