पृथ्वीराजविजय महाकाव्यम् (कवि जयानक - अजमेर चौहान साम्राज्य एवं सम्राट् पृथ्वीराज इतिहास)
Prithvirajavijaya Mahakavya of Jayanaka with Commentary
कश्मीरी कवि जयानक (टीकाकार: जोनरराज) द्वारा
पृष्ठ 234, कुल 330 में से
संदर्भ में पढ़ेंगतैः" -> wait! Is it 'जनपदैरूपागतैः' or 'जनपदैरुपगतैः'?
Wait, look at 'रू': it's 'रू' or 'रु'?
It has: 'रू' or 'रु'? Look at: "जनपदैरूपागतैः" -> wait, 'रू' has a tail, 'रु' has a curve.
Wait, जनपदैः + उपागतैः = जनपदैरूपागतैः? In sandhi: जनपदैः + उपागतैः = जनपदैरुपागतैः (short उ!).
Wait, does it have short उ or long ऊ?
Let's look closely at line 22:
"जनपदैरूपागतैः" -> it shows: र with a loop to the right: 'रू'? Or is it 'रूपागतैः'?
Wait, meter check!
अ ति दा तृ ता म ति क द र्य तां च न (12)
प्र क टी क रो ति ज ल द स्त पा त्य ये (12)
वि हि तो प दे श इ व म ध्य मां स्थि तिं (12)
नृ प शि क्ष या ज न प दै रु पा ग तैः (12)
Let's scan line 4 of verse 18:
नृ(u) प(u) शि(-) क्ष(u) या(-) ज(u) न(u) प(u)