पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)
Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary
महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंआदि पर्व ] पृथ्वीराजरासो । ८३
॥ बीसलदेवजी का पीछा अजमेर आना और सब कथा
प्रसंग पवार जी रानी से कहना ॥
दूहा ॥ दो दिन के मग एक दिन । आए बीसल गेह ॥
किय प्रवेस नृप सहर * सें। सुचित्त भये गृह सेह ॥
छंद० ॥ ४०८ ॥ रू० ॥ १९९ ॥
ऊंच धाम बिसराम किय । रंग साल चतुरंग ॥
प्रौढा महल पवार सैं । कहिय सु कथा प्रसंग ॥
छंद० ॥ ४०९ ॥ रू० ॥ २०० ॥
॥ सब काम-लुब्धाओं को शोच होना कि शंभू ने ऐसा
क्या वर दिया ॥ ?
चौपाई ॥ काम लुबध बोली सब कामनि । च्यार जाम गई जागत जामनि ॥
सब नारिन कौं सोच उपन्नौ । ऐसी कहा संभु वर दिन्नौ ॥
छंद० ॥ ४१० ॥ रू० ॥ २०१ ॥
॥ बीसलदेवजी का कामान्ध हो अकर्तव्य कर्म करना ॥
कवित्त ॥ राति दिवस ण्क्कंसी । काम कामना सु वट्ठिय ॥
प्रौढ मुगध वय वृद्ध । सबै थरि धरि चिय गट्टिय ॥
पर घरनी लै दोन्नि । घरी नह विलंब लगावै ॥
जो विलंब करि रहै । ताहि इनिवे कौं आवै ॥
भै भीत काम बिसराम बिन । नाम सुनत औदिक परै ॥
अजमेर नैर बीसल नृपति । प्रमुदा देखत प्रज्जरै ॥
छंद० ॥ ४११ ॥ रू० ॥ २०२ ॥
- हिन्दी सहर अथवा शहरि शब्द अरबी अथवा फारसी से नहीं है किन्तु संस्कृत
स + हलि से ॥ SK. स + हलि = Agriculture, furrows, Hence a place where agriculturists
reside, Dwelling & habitation, &c. The Hindi हर is also from the SK. हल A plough,
the earth. In the same manner नगर a town is from नग a tree, a mountain & रल् off.
१९९-२०० पाठान्तर :- कै । कैं । सेव ॥ धांम । महिलए । वारि । कौ ।
२०१ पाठान्तर :- कांम । याम गय । जांम । कों उपंनौ । असैं । खिंभु । दीनौन ॥
२०२ पाठान्तर :- कांम । कामना । बढिय तस । सबँ । हरत नारी जस । कौं । विलंब ।
ताहि के पहिन्ने तो विशेष है । भय । कांमं । विसदांम । नहि । नाम । उन्दकि मरै । नृपति ।
प्रजरै ॥