पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)
Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary
महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा
DevanagariHindipublished470 पृष्ठ
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७६ | पृथ्वीराजरासौ । | [ आदि पर्व
तुम देस कहीजै गोउक्रन्न । परवत्त सरोवर नदी रन्न ॥
महाराज उहां महादेव थान । बानास नही कौमारि कान ॥ ३८१ ॥
गिर वर उतंग इक तीन कोस । निझरना झरत मन आव जोस ॥
केतीक दूर अजमेर हूंन । दिन दोय मंझ नीके पहूंत ॥ ३८२ ॥
चढ़ि चल्यौ राज गोक्रन्न दिसान । मै मंत गुरिय घूमत निसान ॥
आवाजि पहूंचिय दस दिसान । अरि भ्रमै वन्न तजि थान थान ॥