सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary

महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा

DevanagariHindipublished470 पृष्ठ

पृष्ठ 457, कुल 470 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 457

४३४ पृथ्वीराजरासो । [ दसवां समय १०
सुलतान का बढ़कर लड़ना, दो घड़ी घोर युद्ध होना ॥
कवित्त ॥ रुप्यौ सेन सुरतान । राज चढि नंधि सुरंगं ॥
कै तिमर अग्ग तपभांन । सिंघ चकौ कि कुरंगं ॥
तब * रूप्यौ राव सिंघरिय । लाज सुविचान षटकिय ॥
सस्त्र तेज बल बंधि । सेन चहुआन घटकिय ॥
द्वै घरिय टोप उप्पर बह्यौ । सार तिनंगा तारयौ ॥
जानै कि तिंदु दारुन जरै । जैत षंभ पर झारयो ॥
छंद० ॥ ३२ ॥ रू० ॥ २७ ॥
दूहा ॥ अथ मुक्क्यौ सिरदार दुहु । देखि भयौ नृप चूक्क ॥
घरी एक झरि सार बहु । ज्यौं अगि संजुत्त जक ॥
छंद० ॥ ३३ ॥ रू० ॥ २८ ॥
यवन सरदारों का माराजाना, पृथ्वीराज की विजय ॥
कवित्त ॥ जुद्ध जुरे सिरदार । राव रंगच बाजी दह ॥
घालि बध्य गज हत्थ । हड्डु संजिय रग गूदह ॥
ज्यौ मुष्टिक चानूर । कन्ह भंजिय अप्पारह ॥
उत्तभंग लै हूर । सूर अपछर उप्पारह ॥
वाजीद षान ओरी धरिय । धाड पंच रंगर नृपति ॥
रष्यै जु षॉन् मिट्टै कवन । निमष मांहि उतपति षपति ॥
छंद० ॥ ३४ ॥ रू० ॥ २९ ॥
हारकर शहाबुद्दीन का ग़ज़नी की ओर लौट जाना ॥
दूहा ॥ चूक चूक भय असुर सुर । फिरि गज्जन दिसि धांन ॥
हारि जुआरी ज्यौं चलै । कर घट्टै कर जान ॥
छंद० ॥ ३५ ॥ रू० ॥ ३० ॥
२७ पाठान्तर—सुरतांन । बाजि चढि । भांन । हक्कै । * अधिक पाठ है । रिघरिय । विहांन । चहुआंन । हटकिय । घरीय । जानैं ॥
२८ पाठान्तर—दुहुं । अगनि । उक्क ॥
२९ पाठान्तर—युद्ध । झुरै । सिरहार । रांव । बाजींदह । बघ । गर । हथ । रंग । अप्पारह । उपारह । वर्जीद । घांड । घाव । यु । सांरं ॥
३० पाठान्तर—गजन । धांन । युवारी । चले । घठे । जांन ॥