पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)
Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary
महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा
पृष्ठ 447, कुल 470 में से
संदर्भ में पढ़ेंदसवां समय १३ ] पृथ्थीराजरासो । ४३०
और उन्होंने इस वृत्तान्त में के "अहेरिया" शब्द पर जो टिप्पण दी है उसमें पृथ्वीराज
जी के इस आखेटक के विषय में यह कहा है-
"In his delight for this diversion, the Rajpoot evinces his Scythic propensity: The
grand hunts of the last Chohan emperor often led him into warfare, for Prithiraj was a
poacher of the first magnitude, and one of his battles with the Tartars was while engaged
in field sports on the Ravi."
TOD'S RAJASTHAN, VOL. I, PAGE 485.
यद्यपि रूपक ४ के वाक्य-बरष रभै षटमास-का अर्थ दो वर्ष और छ महीनों का भी
हो सकता है, परन्तु प्रथम रूपक के वाक्य-वरप एक बीते कलह-की उस के साथ संगति मिलाने
से उस का अर्थ एक वर्ष का ही होता है अर्थात्, वर्ष अर्थात् दो छमाही। सो पाठक विचार देखें ॥
जैसे "हुसैन कथा" वाली रासो की संवत् ११३५ की लड़ाई का कारण हुसैन और चित्ररेखा
का पृथ्वीराज के शरण आना था; वैसेही इस आखेटक चूक की लड़ाई का कारण उनके बेटे
ग़ाज़ी हुसैन का रूपक २ के अनुसार एक महिने और पांच दिन पीछे फिर पृथ्वीराज जी के
पास चला आना है ॥
तथा रूपक ४ एक अपूर्व वृत्त प्रकाशित करता है कि हमारे एक हिन्दू-निसिराव पत्रीय-
दिल्ली में बिराजे हुए हिन्दुओं की बादशाहत नाश करवाने को पृथ्वीराज जी के यहां की
मुख़बरी शहाबुद्दीन को लिखा पढ़ा करते थे । ऐसे जीव भी धन्य हैं !!!