पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)
Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary
महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा
DevanagariHindipublished470 पृष्ठ
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४२२ पृथ्वीराजरासो । [ नवां समय ३८
अमीरों का सुलतान के जीते जगते लौटने
पर बधाई देना और कुशल पूछना ॥
दूहा ॥ और बधाई जुंनरा । करी आइ सुरतांन ॥
अंत्य सबन कीनी घयर । पुजिय पीर ठटांन ॥ छं० ॥ २१० ॥ रु० ॥ ९४ ॥
इति श्री कविचंद विरचिते प्रथ्रिराज रासके हुसेन
षां चित्ररेखा पात्र अधिकारे पातिसाह ग्रहन
नाम नवम प्रस्ताव सम्पूर्णम् ॥ ६ ॥
सुषासनहि । लीय । मथ । जाय । गजनपुरह ॥
९४ पाठान्तर-उमरनि । उमरनि । आय । सुरतांन । अंत्य । पुजोय ॥