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सर्वकोश
पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary

महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा

DevanagariHindipublished470 पृष्ठ

पृष्ठ 403, कुल 470 में से

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पृष्ठ 403

नवां समय ६] पृथ्वीराजरासो । ३६३
साहाबुद्दीन का क्रोध करना और अरब खां को पृथ्वीराज
के पास भेजना कि भला चाहो तो हुसैन
को निकाल दो ॥
छंद पद्धरी ॥ संभरिय बत्त साहाव दीन । उच्चरिय बैन अति कोप कीन ॥
मुक्कौँ दूत चहुआन पास । कढौ हुसैन जो जीव आस ॥ छं० २९ ॥
बेखियौ पांन तातार तव्व ॥ संजाव पांन उमराव सव्व ॥
पुच्छी सु बत्त किय दूत सार । थप्पी सु बत्त पुरमान वार ॥ छं० ३० ॥
आरव्व सेष लीनौ बुलाइ । बैब्रद्ध वृद्ध बुद्धी सुनाइ ॥
बंछै सुप्रेम सक लेहिं साचि । लज्जी अनंत आदब्ब थाचि ॥ छं० ॥३१॥
उच्चर्र्यौ बैन साहाव भास । आरब्य जाहु चहुआन पास ॥
अरबखाँ से कहना कि पहिले हुसैन के पास जाना जो वह
पातुर को दे दे तो हम क्षमा कर देंगे, जो वह गर्व करके
न मानै तो पृथ्वीराज के पास जाकर हमारा
पत्र देकर समझाना ॥
अप्पै जु पाच हुस्सैन जाम । जैखाउ सम्भ हुसेन ताम ॥ छं० ॥ ३२ ॥
मुक्कों सुगुनह कीनौ पसाव । मैं दीन पच्छ करि खिमा दाव ॥
छंडै न पाच हुस्सेन गव्व । चहुआन भिज्जै सामंत सव्व ॥ ३३ ॥
जंपियै वयन चहुआन साइ । कढौ हुसेन नागौर थाइ ॥
अज़ीज पांव तुम सच उच्च । लिप्यौ सु पच हम परम रुच ॥ ३४ ॥
कढौ हुसेन तुम देस अंत । बंकै जो पेम सानौँ सुसंत ॥
रख्या हुसेन जो असु परेस । चतुरंग सेन सज्जीं विसेस ॥ छं० ॥ ३५ ॥
२९ पाठान्तर—उच्चरीय । मुक्तों । कढौ । हुसेन । नौं ॥ २९ ॥ ततार । तब । सब ।
पुछी । कीय । पुरसांन ॥ ३० ॥ आरब शेष । वृद्ध वृद्ध । बुद्धीय । बछै । पिम्म । लेहिं । बज्जी ।
चांदब । थाहिं ॥ ३१ ॥ उच्चर्यौ । वैनं । आरब । हुसैनं । जांम । संम्प । हुसेन । तांम ॥ ३२ ॥
मुक्क्यो । मैं । पछ । हुसेन । यब । सब । अंब ॥ ३३ ॥ बैन । सांइ । धाइ । अज़ीजखांन । संच उच्च ।
लिप्यै । रुच ॥ ३४ ॥ बक्कौ । जौ । यु । मांनौँ । रखौ । जौँ । तौ चतुरंग । सज्जी ॥ ३५ ॥ करौ ।
॥ ३६ ॥ उच्चरि । गुंमांन । कहै । मांनौ । जाहु । शीघ्र । बांम । करौं । निस्मांम ॥ ३७ ॥ सथ ।
असहनन । नरयान । रथ । आरब । दोय । पष ॥ ३८ ॥
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