पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)
Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary
महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअप्प सु चिन्द्यि अवर दिन, रज पठवै रसाल ॥ छं० ॥ २४ ॥ रु० ॥ २४॥
कवित्त ॥ तरकंस पंच गिरंभ । तीन प्रति षगत तीन सच ॥
खुरासान कंमांन । पंच परमान मान जह ॥
गज सु एक सिंघ लीय । श्वेत तन मह रत्ति चह ॥
गुंजते मधुप कपोल । गज्ज भज्जै प्रेमल सच ॥
हय पंच साजि साकति सुनग । ऐराकी कुल उच्च जिहि ॥
अंमोल बज्र इक लाल दोय । रिंझ समिप्पय राज सचि ॥ छं० ॥२५॥॥२५॥
दूहा ॥ राजन रषिय सब्ब इह, प्रनवेज प्रति मंत ।
उभै परस्पर गंठि परि, संचिय पेम सुमंत ॥ छं० ॥ २६ ॥ रु० ॥ २६ ॥
शहाबुद्दीन का चार दूत अजमेर भेजना ॥
दूहा ॥ च्यारि दूत अजमेर पुर, थिर मुक्केसु विहान ।
आखेटक बन देषि कै, तक्कि गए चहुआन ॥
पृथ्वीराज का हुसैन को कैथल, हासी, हिसार का पर्गना देना
और शिकार में साथ रखना, यह सब समाचार
दूतों का शहाबुद्दीन से कहना ॥
कवित्त ॥ आखेटक चहुआन । पास हुस्सेन संपत्तौ ॥
बार आइ चहुआन । भाइ घन ताहि दिषत्तौ ॥
नीति राव कुटवाल । तास अच राज सु अप्पिय ॥
- वर कैथल हंसि हिंसार । राजपहो दै थप्पिय ॥
इह चरित देषि सब दूत तब । जाइ संपते साहि दर ॥
चरावर चरित जुग्गिनी पुरह । कत्थिय बत्त सें मुष्षंधर॥ छं० ॥२८॥ रु०॥२८
२४ पाठान्तर-धरी । हुसेन । चीन्हे । पठवै ॥
२५ पाठान्तर-तीन । पतंग । खुरासांन । कंमांन । पच परमांन मांन जिहि । सिंघलीय ।
मद रति । गज । भंजे । परिमल । है । उंच जिहि । दुइ । रोज ॥
२६ पाठान्तर-रषिय । घन ।
२७ पाठान्तर-यिह । मुके । मुक्कै । विहान । चहुआन ॥
२८ पाठान्तर-चहुआन । हुसेन । संपत्तौ । आय । भाद्र । दिर्षंतौ । नीतिराज । कुटं-
बार । * अधिक पाठ है ॥ कैथल । हांसी । हिंसार । पटो । थपीय । जाय । साहिवर । चवर ।
चरित । जुगिनी । सुष ॥