सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary

महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा

DevanagariHindipublished470 पृष्ठ

पृष्ठ 368, कुल 470 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 368

३५८ पृथ्वीराजरासो । [ सातवां समय ३०
ज्यौं पुनि अगस्ति अप डुक्कलि । खोषि सब्ब सायर खयौ ॥
दांनव क्ति चंपि अंगद वलिय । नंपि उदधि परसैं गयौ ॥
छंदं० ॥ १४६ ॥ रु० ॥ ८७ ॥
कवित्त ॥ वल बंध्यौ नाहर नारिंद * । इंद्र जनु वज्र छह्य ऋषि ॥
सुकति सुफल बड्डीय । बोर ब्रह्मांड तार पुत्ति ॥
नर नाहर ज्यौं लस्यौ । लज्ज पंकल्ल आनुभयौ ॥
सार धार निह्तार । पार सुक्कियग जग सुस्रथौ ॥
कुलछंत केल्लि परिचाररिन । चिसल तेज लग्गिय चिसुक ॥
भग्गौ न भूमि रजपूत हैं। करौं नाम जिम अटल धुव ॥
छंदं० ॥ १४७ ॥ रु० ॥ ८८ ॥
कवित्त ॥ सुनिय मंच सेवकक प्रमांन * । रघट घही फेरहि एम ॥
पेट भरन * चह्यंत । पुठ्ठि दै भार चलचि कम ॥
ते नह गनियै सूर । अंत किचिन कौ नांची ॥
स्वांमि संकरैं छंडि । लो अन्नप्पन घर जांची ॥
गनियै न सूर अरि जूझ बल । अप्प सेन इषि घट्ठियै ॥
जै अजै भाग भूपति कमह । अप्पु दोस अप मिट्टियै ॥
छंदं० ॥ १४८ ॥ रु० ॥ ८६ ॥
कवित्त ॥ वाय रूप प्रथिराज । गज्जि गयो असि झुक्कं ॥
सार धार उक्तार । गुरज भंज्यौ सिरभूक्कं ॥
रच्यौ आन रथ पंहि । पवन रच्यौ गति कुंडि थिर ॥
रहे देव टग चाहि । नथै वैताल बीर भर ॥
८७ पाठान्तर-* अधिक पाठ है । जिति । लौनौ । ज्यौं । दुकलेइ । इक्कलेंद । ज्यौं ।
इक्कलेंद । हनवंत । हनुमंत । ज्यौं । इकले । सत्त इकले । सब । दांनव । परसों ॥
८८ पाठान्तर-नाहर । * अधिक पाठ है। हथि । हथ । सुगति । ब्रह्मंड । ज्यौं । जल
पंकल्ल । निभार । मुक्किग है। । करौ। नांम ॥
८६ पाठान्तर-सेवक । * अधिक पाठ हैं। घटी। घटिका पुठि । चलि । कौं। स्वामी ।
जांहीं । रखि । भुञ्चाति ॥