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पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary

महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा

DevanagariHindipublished470 पृष्ठ

पृष्ठ 303, कुल 470 में से

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पृष्ठ 303

पांचवां समय १३] पृथ्वीराजरासो । २६३
कुट्टैं सिरं करायरं । कपास ज्यौँ पिंजारयं ॥
फुटंत घौ सुषोपरी । कि जोग पच टोपरी ॥ ७७ ॥:
कटंत जंघ कुंभए । मनौ सुरंभ गिंभए ॥

  • परीय संझ सामयं । चलुक्क रक्ख नामयं ॥ छं० ॥ ७८ ॥ रू० ॥ ४२ ॥
    सांझ हो गई परन्तु लड़ाई न रुकी ।
    कवित्त ॥ परिय संझ जग मंझ । टरिय कंकन रंकन धन ॥
    भरिय पच जुगिनीय । करिय सिव माल सीस घन ॥
    मुरिय न श्रित चालुक्क । धरिय रसरोस कन्ह हिय ॥
    पैरि चलिय दरबार । सोच गज घटि उपटिय ॥
    मय मत्त मार मनौ उररि । झररि झर्रि भगिय अनिय ॥
    द्वै घरिय लोह बुट्ठौ लचरि । पेख कयौ किगवारनिय ॥
    ॥ छं० ॥ ७६ ॥ रु० ॥ ४३ ॥
    दूहा ॥ कान्ह जाइ संमुह परत । कला एक मचि रारि ॥
    सत सारघ दूनौ कटै । भजै अबर तजि ढार ॥ छं० ॥ ८० ॥ रु० ॥ ४४ ॥
    कान्ह चौहान का युद्ध जीतना ।
    करपा ॥ झरै (सार) सिर मार विकरार रक्तन भरत ।
    परत धरनीथ द्वैरै जरकि जूपी ॥
    चक्क चहुवांन चालुक्क भृत उपर चर ।
    कोपियं कन्द मनौं काल रूपी ॥ छं० ॥ ८१ ॥
    रुंड भकरुंड किय तुंड मुंडन रुइत ।
    वाचि सिर सार मनौँ मेच बुट्ठै ॥
    ४२ पाठान्तर-धकंत । सौं । हकंत । हूँ । हथ । घाय । पिरें । पीरें । विस्तरै । घाय ।
    भभकि । रुंधि । भट्ट । भट्ठ । वर्षकि । रद । बद । हवकि । हक्कए । चवकि । चक्कए । मोरित्त ।
    म्रोरिर । मुंक्क । मुरु । मुक्कए । श्रॉनि । चक्रए । नट । रिनेंकि । पत । मनौ । कुटं । शिरं । ज्यौं ।
    यों । मनौँ । * यह पाद सं० १६४७ की पुस्तक में नहीं है ॥
    ४३ पाठान्तर-शिव । चालुक । पैट । चलीय । घट । उपटिय । भाठीय ॥
    ४४ पाठान्तर-जाय । समुह । दूनौं । कटे । भजि ॥
    ४५ पाठान्तर-
    अधिक पाठ है । धरनि । मनौ । जम । दारि । नृघात । † यह रूपक
    सं० १६४७ की पुस्तक में नहीं है ॥