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पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary

महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा

DevanagariHindipublished470 पृष्ठ

पृष्ठ 220, कुल 470 में से

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पृष्ठ 220

२१० . पृथ्वीराजरासो । [ दसम समय ३०
कवित्त ॥ सहस भुजा सिर इक्क । नाम अर्जुन घन सज्जिय ॥
सुर अठ षोह्बनि मरदि । करे सुर अपन कज्जिय ॥
भरि रुद्धि षप्र जुगनीय । ईस मुंडन भर बध्यिय ॥
पलचर रुधि चर पूरि । सक्र करि कारज सध्यिय ॥
दिय दान पानि पृथिवी दुजन । करे रुधिर कुंडन चपन ॥
सुर नरन नाग कित्तिय उच्चरि । फरसराम षिचिय षपन ॥
छं० ॥ २६३ ॥ रु० ॥ ५८ ॥
॥ रामावतार की कथा ॥
दूहा ॥ फरसराम क्षिति पति हते । क्षिति अप्पी निज वंस ॥
रघुवंसी दसरत्थ घर । श्रीरघुपति अवतंस ॥ छं० ॥ २६४ ॥ रु० ॥ ५८ ॥
रघुवंसन राषिस रमन । भयौराम अवतार ॥
वेद भ्रात दसरथ सुतन । नयर अजुध्यासार ॥ छं० ॥ २६५ ॥ रु० ॥ ६० ॥
भये राम लषिमन सुबर । भरथ सतुघन भ्रात ॥
अरि रावन रच्छस चरिय । तिन वन लिखिय तात ॥ छं० ॥ २६६ ॥ रु० ॥ ६१ ॥
कवित्त ॥ तरुनि नाम तारिका । ग्यांन हरि परसीरामं ॥
वरि सत्ती धानुष्ष । किए सब सुभ्रच्छ कामं ॥
केकईयै बर मंगि । राम बन भरत सुराजं ॥
तब दसरथ दुष कीन । भयौ धुर काज अकाजं ॥
दसरत्थ पाइ परसे उभय । पंच बटी बंधी कुटिय ॥
कवि चंद छंद परबंध करि । लंक कंक जिहि बिधि जुटिय ॥
छं० ॥ २६७ ॥ रु० ॥ ६२ ॥
५८ पाठान्तर :- इक्क । नांम । अरजुन । अर्जुन । सज्जिय । षौह्वनि । मरद । करै । सुरै ।
कज्जिय । रुधिर । युगिनिय । जोगिनिय । इस मुंडम । बथिय । पलवर । रुधिवर । सक्र । कारिज ।
सथिय । दीय । दांन । पांनि । प्रियवी । करि कुंडन रुधिर सु त्रपने । नग । कित्तीय । षिचीय ॥
५९-६१ पाठान्तर :- फरसरांम । हतै । अपी । भिज । दसरथ ॥ ५९ ॥ राषि । रखन । रांम ।
श्रीरामं । वैद । दसरथं । सुतंन । अयोध्या ॥ ६० ॥ भये । भयौ । राम । लक्षिमन । लछमन ।
भरत । शत्रुघ्न । रखसंहरिय । वन । लषिय । लिषयं ॥ ६१ ॥
६२-६४ पाठान्तर :- नांम । ग्यंन । परसीरांमं । बरो । सती । धानुष । कीए । सुभ्रह ।
केकईय । केकइयें । रांम । भत । दुषि । किन । दसरथ । पाय । व । बंटी । पटबंध । जिहिं ॥

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या) · पृष्ठ 220, कुल 470 में से · SarvaKosh