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पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary

महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा

DevanagariHindipublished470 पृष्ठ

पृष्ठ 141, कुल 470 में से

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पृष्ठ 141

·१३० पृथ्वीराजरासौ । [ आदि पर्व
कवित्त ॥ परी भीर सोमेस । सोम बंसी सहाय भय ॥
मार मार उच्चरंत । सेन चतुरंग हयग्गय ॥
गजदंता बिक्कुरंत । बीर सेरी झननंकत ॥
टोप टूक बिक्कुरंत । पग्ग भागत रमनंकत ॥
रस रास बीर कमधज्ज भय । संमुह बीर निहाइया ॥
संभरी राव संभारि छुह । लग्गो लोह उचाइया ॥
छं० ॥ ६५६ ॥ रू० ॥ ३३४ ॥
पद्धरी ॥ उच्चाय लोह लगि व्योम थान । मानों कि हरिय बल कलन बान ॥
जुहौ सु अरिन दल मझ्झ जाइ । मांनो कि सिंघ गज जूथ पाइ ॥ छं० ६५७ ॥
इन बिद्ध सोम मिल लोह पूर । आवड रीठ मत्ती कहूर ॥
झन नंकि बान बजि गोम धंक । कायर पुलंत सूरा निसंक ॥ छं० ॥ ६५८ ॥
दल मिलग सेन बे बाह बीर । बरसें अनंग ग्रज्जंत धीर ॥
मांचंत कूच वजि लोह सार । जुहंत सूर रिन करि पचार ॥ छं० ॥ ६५९ ॥
राजंत राग सिंधू * कराल । बाजंत बज्ज जनु मेध काल ॥
छहकंत घाव वाहंत धीर । किलकत नह नारद बीर ॥ छं० ॥ ६६० ॥
डक्कंत डक्क डाइन डरान । गच्छंत गिद्धि सिद्धनिय थान ॥
नाषंत देव मच्छंत फूल । खच्छंत दुष्य मन मध्य हूखि ॥ छं० ॥ ६६१ ॥
उररीय सेन सजि अनंगपाल । भर हरो भोर कमधज बिसाल ॥
सूत पैंड जाइ फिर लग्गि घाय । आतार रीठ मत्तौ उराय ॥ छं० ॥ ६६२ ॥
३३४ पाठान्तर :-परी । सोमेष । बंसी । हय गय । गजदिंता । झननंकंतः । टौक ।
बिक्कूरंत । पग । भगंत । रननंक्रीत । रननंकेत । रस सुर । वीर । समूह वीर । बिहाइया । निहा-
ईया । संभरी । लग्गै । लगों । उचाईया । उच्चारिया ॥

  • संगीत शास्त्रवेत्ता और अन्य सब को स्मरण में रखने की बात है कि संगीत के आचार्य
    भरत जो सिंधू राग को वीर रस में मानते हैं उस का प्रचार इस समय तक पाया जाता है अर्थात्
    लड़ाई में सिन्धु राग गाया और बजाया जाता था और व्यूह रच के लड़ना भी पृथ्वीराजजी के
    समय तक प्रचलित रहा है ॥
    ३३५ उच्चाय । लौह । ष्योम । योम । यांन । मांने । मनो । हरि । हरी बलि बलन बानं ।
    हरीय । बांन । झुंदौ । जुटौ । जुटो । मभ्र । जाय । मांनौ । मांनो । जुथ । पाय । इनि । विध ।
    विधि । सोम । मिलि । लौह । पुर । रौदु । मती । बान । शूरा । हलि । मिलिग । वै वाह ।
    बरसै । यजंट । मांवत । जुठंत । सिंधु । मेघ । घातय । घाय । बहंत । नद । नारद । डक ।