प्रतिमानाटकम् (महाकवि भास - विमला संस्कृत-हिन्दी टीका एवं सविस्तार व्याख्या सहित)

प्रतिमानाटकम् (महाकवि भास - विमला संस्कृत-हिन्दी टीका एवं सविस्तार व्याख्या सहित)
Pratimanatakam of Mahakavi Bhasa
महाकवि भास (व्याख्याकार: डॉ. श्रीकृष्ण कुमार) द्वारा
DevanagariHindipublished296 पृष्ठ
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राजा—(आचमन करके देखकर)
ये देवराज इन्द्र के मित्र दिलीप हैं, ये रघु हैं, ये मेरे पूज्य पिता अ
है । आप लोगों के यहाँ आने का क्या कारण है ? अब तो मेरे लि
भी आपके साथ रहने का समय आ पहुँचा है ।
र म, सीता, लक्ष्मण, मैं अब यहाँ से पितरो के पास जा रहा हूं ।
पितरों, यह मैं आया । (संज्ञा हीन हो जाते हैं ।)
(काञ्चुकीय पर्दा गिराता है)
सब—हाय, हाय, महाराज । हाय, हाय, महाराज ।
(सब निकलते हैं)
दूसरा अंक समाप्त ।