प्रतिमानाटकम् (महाकवि भास - विमला संस्कृत-हिन्दी टीका एवं सविस्तार व्याख्या सहित)

प्रतिमानाटकम् (महाकवि भास - विमला संस्कृत-हिन्दी टीका एवं सविस्तार व्याख्या सहित)
Pratimanatakam of Mahakavi Bhasa
महाकवि भास (व्याख्याकार: डॉ. श्रीकृष्ण कुमार) द्वारा
DevanagariHindipublished296 पृष्ठ
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काञ्चुकीय—हे कुमार, मत जाइए । ये महाराज दशरथ-सीता के सँ
आपका वनगमन तथा भ्रातृस्नेह के वशीभूत लक्ष्मण का अनुगमन न
कर, वृद्ध महाराज उठ कर पृथ्वी की धूलि से धूसरित शरीर वा
वन्य गजराज की भाँति काँपती चाल से आप लोगो को देखने के लि
इधर ही आ रहे हैं । (३०)
लक्ष्मण—आर्य,
वस्त्र के रूप में केवल वल्कल मात्र को पहने हुए हम वन-
वासियो को देखकर क्या करेंगे ?
राम—हमारे चले जाने पर महाराज हमारे प्रधान निवास स्थानो को देखा
करेंगे ।
(इस प्रकार सब निकल जाते हैं )
प्रथम अंक समाप्त ।