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प्रतिमानाटकम् (महाकवि भास - विमला संस्कृत-हिन्दी टीका एवं सविस्तार व्याख्या सहित)

प्रतिमानाटकम् (महाकवि भास - विमला संस्कृत-हिन्दी टीका एवं सविस्तार व्याख्या सहित)

Pratimanatakam of Mahakavi Bhasa

महाकवि भास (व्याख्याकार: डॉ. श्रीकृष्ण कुमार) द्वारा

DevanagariHindipublished296 पृष्ठ

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पृष्ठ 22

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स्थित थे। रावण अकेली सीता का अपहरण कर लेता है। सीता की करुण
पुकार सुन कर गिद्धराज जटायु वहां उपस्थित होता है।
छठा अंक-रावण और जटायु के मध्य भयंकर युद्ध होता है। अन्त
मे जटायु को समाप्त कर रावण सीता को लंका ले जाने मे सफल होता है।
जनस्थान के दो तपस्वी इसकी सूचना राम को देते हैं। राम से मिलने सुमन्त्र
वहा आते है, किन्तु उन्हे वहा न पाकर भरत को सीताहरण के विषय मे
बताते है और कहते है कि वे आजकल किष्किन्धा में सुग्रीव के समीप है।
भरत जब कैकेयी को क्रुद्ध होकर यह समाचार देता है, तो कैकेयी राजा
दशरथ को अन्ध मुनि पुत्र को मारने से दिए गए शाप के बारे मे परिचित
कराती है। इसे सुनकर भरत अपनी जननी कैकेयी को निर्दोष मानता है
और अपनी सेना लेकर लंका के राजा रावण के विरुद्ध अभियान की घोषणा
करता है।
सातवां अंक--रावण को मार कर राम आदि जनस्थान पहुंचते
है। यहा राम और सीता इस स्थान की अपनी पूर्व की अनुभूतियों को कहते
है। इसी बीच वहा भरत अपने समुदाय के साथ आ जाते हैं और राम को
अयोध्या का राज्य संभला दिया जाता है। कैकेयी भी इस अवसर पर अत्यन्त
प्रसन्न है, जो यह कामना करती है कि ऐसा ही अभिषेक अयोध्या मे भी
सम्पन्न होना चाहिए। राम इसकी अनुमति प्रदान करते है। विभीषण, सुग्रीव,
हनुमान आदि भी राम को बधाई देते है। अन्त मे ये सभी लोग पुष्पक
विमान मे बैठ कर अयोध्या प्रस्थान करते है। इस प्रकार इस आनन्दपूर्ण
समारोह के बीच नाटक की समाप्ति होती है।
भास का कथावस्तु में परिवर्तन
नाटककार भास ने रामायण से ली गई इस कथावस्तु को नाटकीय
बनाने के लिए अपने प्रतिमा नाटक मे पर्याप्त परिवर्तन किया है, जो इस
प्रकार है-
(1) इस नाटक के प्रथम अंक मे प्राप्त होने वाली "वल्कल घटना"
का रामायण मे कही संकेत नहीं है। भास ने इससे राम और सीता के
मधुर पारिवारिक जीवन का एक दृश्य उपस्थित किया है।