प्रतिमानाटकम् (महाकवि भास - विमला संस्कृत-हिन्दी टीका एवं सविस्तार व्याख्या सहित)
Pratimanatakam of Mahakavi Bhasa
महाकवि भास (व्याख्याकार: डॉ. श्रीकृष्ण कुमार) द्वारा
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हिन्दी अर्थ
(इसके बाद-शत्रुघ्न का प्रवेश)
शत्रुघ्न—अनेक प्रकार के दु खो से घिर कर भी जिनका दिव्य तेज और गुण
प्रदीप्त होता रहा और जिन्होंने अपने प्रबल शत्रु रावण का सरलता
से विनाश किया, पूज्य राम को देखने के लिए मेरा मन शीघ्रता कर
रहा है । (8)
(पास जाकर) आर्य, मैं शत्रुघ्न प्रणाम करता हूँ ।
राम—वत्स, आओ, आओ । कल्याण हो, दीर्घायु बनो ।
शत्रुघ्न—अनुगृहीत हूँ । आर्ये प्रणाम ।
सीता—वत्स, बहुत समय तक जीवित रहो ।
शधुघ्न—अनुगृहीत हूँ । आर्य, प्रणाम करता हूँ ।
लक्ष्मण—कल्याण हो, दीर्घायु बनो ।
शत्रुघ्न—अनुगृहीत हूँ । आर्य, ये, दोनो वसिष्ठ और वासुदेव प्रजागण के
साथ अभिषेक को आगे लेकर आपसे-मिलना चाहते हैं।
मुनिजन स्वयं जाकर बहुत सी छोटी-बडी नदियो से तीर्थ जल लाए
है । उनकी इच्छा है-कि आप सर्वप्रथम अभिषेक जल ग्रहण करे ।
इसके बाद अभिषेक जल से सिक्त कमल की तरह विकसित आपके
मुख का वे दर्शन करना चाहते है । (६)
कैकेयी—जाओ पुत्र । राज्याभिषेक को स्वीकार करो ।
राम—जैसी जननी की आज्ञा । (निकल जाते हैं)
(नेपथ्य मे)
आपकी जय । स्वामी की जय । महाराज की जय ।
देव की जय । भद्रमुख की जय । आर्य की जय ।
रावण के विनाशक की जय ।
कैकेयी—ये पुरोहित और कचुकी मेरे पुत्र का विजय नाद करते हुए
आशीर्वचनों अभिनन्दन कर रहे है
सुमित्रा—प्रजा के लोग, सेवक और सज्जन गण मेरे पुत्र की विजय घोषणा
कर रहे है ।
(नेपथ्य मे)
हे जनस्थान मे रहने वाले तपस्वियो, आप लोग सुनिए, सुनिए ।
जिस प्रकार सूर्य अपनी प्रखर किरणों से अन्धकार का विनाश करता